युवा मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जो कम सुनने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा कारण है – ईयरफोन का लगातार इस्तेमाल।
डॉक्टरों की चेतावनी
केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. पीयूष प्रिय ने बताया कि ओपीडी में आने वाले करीब 20% युवा मरीज सुनने की समस्या से जूझ रहे हैं। लगातार ईयरफोन का इस्तेमाल कान के परदे को नुकसान पहुंचाता है और हड्डी व नसें कमजोर करता है।
उम्र से पहले हो रही समस्या
आमतौर पर सुनने की क्षमता 40 साल की उम्र के बाद कम होती है। लेकिन अब ईयरफोन की वजह से यह समस्या युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। इससे कान में छेद होने का खतरा भी बना रहता है।
कोरोना और प्रदूषण का असर
डॉ. प्रिय के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटी है। पहले जहां लोग साल में दो बार ही सर्दी-खांसी से परेशान होते थे, अब यह समस्या औसतन चार बार देखने को मिल रही है। खासकर शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण के कारण यह स्थिति और गंभीर हो गई है।
बच्चों में नई समस्या
उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों में नाक की हड्डी टेढ़ी होने की शिकायत सामने आ रही है। समय पर इलाज न कराया जाए तो भविष्य में सरकारी नौकरी के मेडिकल टेस्ट में दिक्कतें आ सकती हैं।



