भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का व्रत किया जाता है। इस बार यह पावन पर्व 6 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, “अनंत” का अर्थ है – जिसका न आदि है और न अंत। अनंत चतुर्दशी को भगवान विष्णु के अनंत रूपों की उपासना का दिन माना जाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष अनंत चतुर्दशी की पूजा का समय सुबह 6:02 AM से लेकर 1:41 AM (6 सितंबर रात्रि तक) रहेगा।
- पूजा अवधि : 19 घंटे 39 मिनट
बन रहे हैं चार विशेष योग
इस बार अनंत चतुर्दशी पर चार अद्भुत शुभ योग बन रहे हैं –
- बुधादित्य राजयोग
- त्रिग्रही योग (सूर्य, बुध और केतु की युति से)
- सुकर्मा योग
- रवि योग
इन विशेष योगों के कारण इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषियों के अनुसार, व्रत और पूजा करने वालों को इन योगों का शुभ फल प्राप्त होगा।
शनिवार को व्रत का विशेष महत्व
शास्त्रों में उल्लेख है कि यदि अनंत चतुर्दशी शनिवार के दिन पड़े, तो इसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। इस बार यह पर्व शनिवार को आ रहा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है।
अनंत सूत्र की परंपरा और धार्मिक मान्यता
अनंत चतुर्दशी पर 14 गांठों वाले अनंत सूत्र को पूजा के बाद बांह पर बांधने की परंपरा है।
- पुरुष : दाहिने हाथ पर बांधते हैं।
- महिलाएं : बाएं हाथ पर बांधती हैं।
यह सूत्र भगवान विष्णु द्वारा रचे गए 14 लोकों (भूलोक से पाताल तक) का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसे धारण करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और समृद्धि आती है।



