शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि की आराधना को समर्पित रहा। सोमवार को देशभर में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के इस उग्र रूप की पूजा-अर्चना कर समृद्धि, शक्ति और सुरक्षा की कामना की। धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि की उपासना से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
मां कालरात्रि का दिव्य स्वरूप
हिंदू धर्मग्रंथों में मां कालरात्रि को चार भुजाओं, तीन नेत्रों और काले आभा से युक्त बताया गया है। बिखरे हुए केश और बिजली-सी चमकती माला उनके स्वरूप की विशेषता है। ऐसा माना जाता है कि उनकी श्वास से अग्नि निकलती है। एक हाथ में तलवार, दूसरे में अस्त्र और शेष दोनों हाथ वरदान व अभय मुद्रा में रहते हैं।
पूजा का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के सातवें दिन के लिए विशेष मुहूर्त निर्धारित किए गए थे।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:37 से 5:25 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:47 से 12:35 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:11 से 2:58 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:09 से 6:33 बजे तक
- अमृत काल: रात 11:15 से 1:01 बजे तक
इन समयों पर मां की पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है।
भोग और अर्पण
श्रद्धालुओं ने मां कालरात्रि को गुड़ से बने मिष्ठान, विशेषकर खीर का भोग लगाया। लाल रंग को शुभ मानते हुए पूजा में लाल फूल जैसे गुड़हल और गुलाब अर्पित किए गए। इसी के साथ घर के मंदिर को गंगाजल, चावल, चंदन, सिंदूर, वस्त्र, धूप और घी के दीपक से सजाया गया।
मंत्र और पाठ
पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ किया। विशेष मंत्र —
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ॐ कालरात्रि देवयै नमः”
— का जाप कर भक्तों ने मां से आशीर्वाद की प्रार्थना की।
नवरात्रि का महत्व
नवरात्रि देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का पर्व है, जो महानवमी और विजयादशमी तक चलता है। मां कालरात्रि की आराधना न केवल भय को दूर करती है बल्कि जीवन में साहस और आत्मविश्वास भी बढ़ाती है।



