नवरात्रि 2025: दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें ज्योतिषीय योग और महत्व

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना, आस्था और साधना का अद्भुत संगम

Savitri Mehta
Navratri 2025 Brahmacharini Second Day Celebration
Navratri 2025 Brahmacharini Second Day Celebration (PC: BBN24/Social Media)

पटना: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन पूरे देशभर में श्रद्धालु मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मां का यह स्वरूप तपस्या, संयम और आंतरिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

ज्योतिषीय महत्व और शुभ योग

इस दिन हस्त नक्षत्र के साथ ब्रह्म योग और द्वि पुष्कर योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार द्वि पुष्कर योग सोमवार दोपहर 1:40 बजे से मंगलवार सुबह 4:51 बजे तक रहेगा। वहीं ब्रह्म योग रात 8:23 बजे तक प्रभावी रहेगा।
राशिफल के अनुसार मेष राशि वालों को परिवार में सामंजस्य और पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है, जबकि कन्या राशि के जातकों को घरेलू विवादों से सावधान रहने की सलाह दी गई है।

मां ब्रह्मचारिणी का महत्व

नवरात्रि के दूसरे दिन पूजित मां ब्रह्मचारिणी, देवी दुर्गा के नौ रूपों में से दूसरा रूप हैं। इन्हें तपस्या और ध्यान की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। ‘ब्रह्मचारिणी’ का अर्थ है — तप का आचरण करने वाली। आस्थावान मानते हैं कि मां की पूजा से साधना में दृढ़ता आती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

पूजा विधि और अर्पण

मां की पूजा में पंचामृत स्नान के बाद सफेद व सुगंधित पुष्प, कुमकुम, अक्षत और कमल चढ़ाए जाते हैं। मां को विशेष रूप से मिश्री, दूध और मिठाई का भोग प्रिय माना जाता है। प्रतिमा में मां को श्वेत वस्त्र धारण किए, एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल के साथ चित्रित किया जाता है।

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