नेपाल राजनीतिक अस्थिरता और तख्तापलट के दौर से गुजर रहा है। लगातार बढ़ते प्रदर्शनों और प्रधानमंत्री केपी ओली के इस्तीफे के बाद देश में अंतरिम सरकार को लेकर नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। इसी बीच, नेपाल की पूर्व सीजेआई (Chief Justice of Nepal) सुशीला कार्की का नाम अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर उभरकर सामने आया है।
क्यों खास है सुशीला कार्की का नाम?
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव ने दावा किया कि देशभर के जेन-जी प्रदर्शनकारी, जो अब तक काठमांडू के मेयर बालेन शाह को सत्ता सौंपने की मांग कर रहे थे, अब सुशीला कार्की पर सहमत होते दिख रहे हैं।
एक वर्चुअल मीटिंग में 5,000 से अधिक युवाओं ने भाग लिया और कार्की को सबसे अधिक समर्थन दिया।
भारत से है गहरा कनेक्शन
सुशीला कार्की का भारत से भी गहरा नाता है। उन्होंने 1975 में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट-ग्रेजुएशन किया। यह कड़ी भारत-नेपाल संबंधों को और महत्वपूर्ण बनाती है।
सुशीला कार्की: नेपाल की पहली महिला CJI
- जन्म: 7 जून 1952, विराटनगर, नेपाल
- परिवार: माता-पिता की 7 संतानों में सबसे बड़ी
- शिक्षा: विराटनगर के महेंद्र मोरंग कैंपस से BA, BHU वाराणसी से PG
- करियर: 1979 में वकालत की शुरुआत, 2009 में सुप्रीम कोर्ट में एडहॉक जज नियुक्त
- उपलब्धि: 2016 में नेपाल की पहली और अब तक की एकमात्र महिला CJI बनीं
नेपाल की राजनीति में बदलते समीकरण
नेपाल में बीते तीन दिनों से हिंसक प्रदर्शनों ने हालात बिगाड़ दिए हैं। केपी ओली के इस्तीफे के बाद पहले बालेन शाह का नाम सबसे आगे था, लेकिन उनके सहमति न देने के बाद अब सुशीला कार्की का नाम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उनका अनुभव, साफ छवि और न्यायपालिका से जुड़ा लंबा सफर उन्हें प्रदर्शनकारियों के बीच एक विश्वसनीय विकल्प बनाता है।
यह साफ है कि नेपाल की राजनीति के इस कठिन मोड़ पर सुशीला कार्की का नाम निर्णायक भूमिका निभा सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वह वास्तव में नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बनेंगी।



