Iran Speaker Qalibaf: ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। उन्होंने साफ कहा कि बातचीत के लिए ईरान का इरादा नेक है, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
बातचीत से पहले ईरान की दो बड़ी शर्तें
Mohammad Bagher Ghalibaf ने वार्ता से पहले दो अहम शर्तें रखीं—
- लेबनान में तत्काल सीजफायर लागू किया जाए
- अमेरिका द्वारा रोकी गई ईरान की संपत्तियां रिलीज की जाएं
ईरान का कहना है कि जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।
همراهان من در این پرواز#Minab168 pic.twitter.com/xvXmDlSDiF
— محمدباقر قالیباف | MB Ghalibaf (@mb_ghalibaf) April 10, 2026
पीड़ितों की तस्वीरों के साथ पहुंचे गालीबाफ
गालीबाफ अपने साथ ‘मीनाब घटना’ के पीड़ितों की तस्वीरें भी लेकर पहुंचे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन तस्वीरों को साझा करते हुए भावुक संदेश दिया।
‘धोखा हुआ तो देंगे मुंहतोड़ जवाब’
ईरानी स्पीकर ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बातचीत को दिखावा या धोखे के तौर पर इस्तेमाल किया गया, तो ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले डेढ़ साल में दो बार बातचीत के दौरान ही ईरान पर हमले हुए हैं, जिससे अविश्वास और बढ़ा है।
अमेरिकी टीम की अगुवाई करेंगे जेडी वेंस
दूसरी ओर, अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance इस वार्ता में शामिल होंगे। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और Jared Kushner भी मौजूद रहेंगे।
अमेरिका ने संकेत दिया है कि अगर ईरान ईमानदारी से बातचीत करता है, तो वह संबंध सुधारने के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह की चालाकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सीजफायर को लेकर विवाद
यह वार्ता दो हफ्ते के अस्थायी सीजफायर समझौते को आगे बढ़ाने के लिए हो रही है। हालांकि, इस पर विवाद बना हुआ है।
ईरान का दावा है कि इसमें इजरायल द्वारा लेबनान में किए जा रहे हमलों को रोकना शामिल है, जबकि अमेरिका और इजरायल का कहना है कि यह समझौता हिजबुल्ला के ठिकानों पर लागू नहीं होता।
दुनिया की नजरें इस्लामाबाद बैठक पर
शनिवार को होने वाली इस अहम बैठक से उम्मीद की जा रही है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव को कम करने की दिशा में कोई ठोस रास्ता निकल सकता है।
अब देखना होगा कि क्या यह बातचीत शांति की ओर कदम बढ़ाती है या फिर टकराव और बढ़ता है।


