West Bengal Voter List SIR Case: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने राज्य में भयावह स्थिति पैदा कर दी है. एक ओर मामला देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में पहुंच चुका है, तो दूसरी तरफ जमीन पर ‘पहचान’ खोने का डर लोगों की जान ले रहा है.
‘विचाराधीन’ नामों पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट उन मतदाताओं की नयी याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से हटा दिये गये हैं. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी की दलीलों को स्वीकार किया. वकील ने तर्क दिया कि ये वे मतदाता हैं, जिन्होंने पहले वोट दिया था, लेकिन अब उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किये जा रहे हैं.
बादुरिया में वोटर लिस्ट से नाम कटा, तो लगा ली फांसी
इस कानूनी लड़ाई के बीच उत्तर 24 परगना के बादुरिया से एक दिल दहला देने वाली खबर आयी. पश्चिम चांदीपुर गांव की 50 वर्षीय रीना रानी कुंडू ने सोमवार को कथित तौर पर इसलिए आत्महत्या कर ली, क्योंकि एसआईआर के बाद उसका नाम विचाराधीन की सूची में डाल दिया गया था. उसके 2 बेटों शुभदीप और सौमेन के नाम सूची में नहीं थे.
बेटे काट रहे थे बीडीओ ऑफिस का चक्कर, मां ने लगा ली फांसी
खबर है कि जिस वक्त रीना ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या की, उस वक्त उनके दोनों बेटे बीडीओ ऑफिस में अपनी नागरिकता और पहचान के दस्तावेज लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.
SIR में 60 लाख नाम ‘विचाराधीन’
निर्वाचन आयोग ने 28 फरवरी को वोटर लिस्ट जारी की. इसमें 60 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘विचाराधीन’ श्रेणी में रखा गया है. आयोग के अनुसार, माता-पिता के नाम का मेल न होना या उम्र में 15 साल से कम/50 साल से अधिक का अंतर होना ‘विसंगति’ माना जा रहा है.
राजनीतिक उबाल और प्रशासनिक चुनौती
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही आरोप लगाया है कि एसआईआर प्रक्रिया का इस्तेमाल लोगों को मताधिकार से वंचित करने के लिए किया जा रहा है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि कोई भी व्यक्ति इस प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकता.


