बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने बड़ा सियासी दांव चलने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी 10 अगस्त से राज्यव्यापी पदयात्रा पर निकलेंगे, जो 26 अगस्त तक चलेगी। इस दौरान वे 18 जिलों में जनता से सीधे संवाद करेंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेंगे।
इस पदयात्रा की शुरुआत सासाराम स्थित प्रसिद्ध तुतला भवानी मंदिर से होगी। यह स्थान न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य के कारण भी चर्चित है। कांग्रेस की योजना है कि पहले दिन का पड़ाव औरंगाबाद में रखा जाएगा, जहां रात्रि विश्राम के बाद यात्रा अगले दिन गया की ओर बढ़ेगी।
जनसभाओं और पदयात्रा से जोड़ेंगे जनता से संवाद
इस पदयात्रा का सबसे अहम उद्देश्य है – जनता से सीधा संपर्क और चुनावी मुद्दों पर संवाद। राहुल गांधी हर जिले में जनसभाएं करेंगे, जिसमें वे आम नागरिकों की समस्याएं सुनेंगे और पार्टी का विज़न साझा करेंगे।
कांग्रेस सूत्रों की मानें तो इस यात्रा से कार्यकर्ताओं में राजनीतिक ऊर्जा का संचार होगा। यह यात्रा मगध, पटना और कोसी प्रमंडलों के प्रमुख जिलों को कवर करेगी, जहां पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
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पटना में महागठबंधन की रैली, दिखेगी विपक्ष की ताकत
यात्रा के अंतिम चरण में पटना में गांधी मैदान पर महागठबंधन की विशाल रैली का आयोजन प्रस्तावित है। इसमें कांग्रेस के साथ-साथ अन्य घटक दलों के शीर्ष नेता भी मंच साझा करेंगे। इसके अलावा राज्य के आठ प्रमंडलों में भी शक्ति प्रदर्शन की योजना है।
इस रैली के माध्यम से विपक्ष जनता के सामने एकजुटता और चुनावी तैयारियों का संदेश देना चाहता है। राहुल गांधी की मौजूदगी महागठबंधन को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं में उत्साह बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी।
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यात्रा की तैयारी में जुटी कांग्रेस, स्थानीय नेतृत्व को भी जिम्मेदारी
इस पूरी यात्रा की योजना दिल्ली से आई कांग्रेस की विशेष टीम और प्रदेश कांग्रेस कमेटी मिलकर बना रही है। यात्रा को प्रभावी बनाने के लिए कुछ वैकल्पिक प्रारंभिक स्थलों पर भी विचार किया जा रहा है। हर जिले में स्थानीय नेताओं को यात्रा की जमीनी तैयारियों की जिम्मेदारी दी गई है।
राहुल गांधी इस यात्रा के जरिए केवल जनसभा ही नहीं करेंगे, बल्कि आम जनता से सीधी बातचीत, स्थानीय मुद्दों की पहचान और नीतिगत सुझावों पर भी ध्यान देंगे। इस पदयात्रा के जरिए कांग्रेस न केवल चुनावी माहौल बनाएगी बल्कि संगठन को भी सक्रिय करने का प्रयास करेगी।
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बिहार में राहुल गांधी की 16 दिवसीय पदयात्रा, न केवल कांग्रेस के लिए संगठनात्मक मजबूती की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि आगामी चुनावी लड़ाई में इसे एक निर्णायक मोड़ भी माना जा रहा है। क्या यह यात्रा बिहार के राजनीतिक परिदृश्य को नया मोड़ दे पाएगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा, लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस अब पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने जा रही है।



