पटना का रहस्यमयी पीताम्बरा मंदिर: मां वराही के दर्शन केवल सूर्यास्त के बाद ही क्यों?

सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा पटना का प्राचीन पीताम्बरा मंदिर, जहां मां वराही की मूर्ति दिनभर ढकी रहती है और शाम ढलते ही भक्तों को दर्शन देती है।

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Patna Pitambara Temple Maa Barahi Evening Darshan
Patna Pitambara Temple Maa Barahi Evening Darshan (PC: BBN24/Social Media)

पटना: पटना सिटी के गुड़ी मंडी क्षेत्र में स्थित प्राचीन पीताम्बरा मंदिर, जिसे बंगला मुखी मंदिर भी कहा जाता है, अपनी अनोखी परंपरा के कारण पूरे देश में खास पहचान रखता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां स्थापित मां वराही की मूर्ति दिनभर ढकी रहती है और केवल सूर्यास्त के बाद ही भक्तों को दर्शन देती है।

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

मंदिर के पुजारी मधुकर शर्मा बताते हैं कि यह मंदिर वर्ष 1826 में निर्मित हुआ था। इसे सभी देवताओं का “मुख्यालय” माना जाता है। वाराणसी के अलावा, भारत में केवल पटना ही वह जगह है, जहां मां वराही की प्रतिमा विराजमान है।

शाम ढलते ही शुरू होते हैं विशेष अनुष्ठान

हर दिन दोपहर 3:30 बजे मां का अभिषेक और श्रृंगार होता है। इसके बाद शाम 6 बजे मंदिर के द्वार खुलते हैं और भक्तों को दर्शन मिलता है। मुख्य पूजा का आयोजन देर रात 10 बजे से मध्यरात्रि तक होता है, जिसमें हजारों भक्त शामिल होते हैं।

नवरात्र में उमड़ती है भक्तों की भीड़

नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी को यहां विशेष पूजा होती है और भक्त लंबी कतारों में लगकर मां वराही के चरणों में अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि मां वराही सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं। यही कारण है कि आम लोगों से लेकर बड़े राजनेता और अधिकारी भी इस मंदिर में आते रहते हैं।

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