बड़ी साजिश या सुरक्षा? पंचायत मुखिया-सरपंचों को हथियार लाइसेंस देने के फैसले पर हाईकोर्ट में घमासान

आर्म्स लाइसेंस पर बिहार सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में दी गई चुनौती, याचिका में निष्पक्ष चुनाव में बाधा की जताई आशंका

Rohit Mehta Journalist
Patna Highcourt Arms License Mukhiya Sarpanch
Patna Highcourt Arms License Mukhiya Sarpanch (Source: BBN24/Google/Social Media)

पटना: Patna Highcourt में बिहार सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें पंचायत के मुखिया और सरपंचों को हथियार का लाइसेंस देने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। इस फैसले के खिलाफ राजीव रंजन सिंह ने जनहित याचिका दायर कर विधानसभा चुनाव तक इस निर्णय को रद्द करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि यह फैसला चुनाव में निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकता है।

राज्य सरकार पर निष्पक्षता में बाधा पहुंचाने का आरोप

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि सरकार के इस फैसले से अधिकारियों को निष्पक्ष चुनाव कराने में दिक्कत आ सकती है। इससे प्रदेश में विधि-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है। उन्होंने 1 जुलाई 2025 को राज्य सरकार सहित संबंधित अधिकारियों को इस मुद्दे पर आपत्ति भेजी थी, लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।

राज्य के प्रमुख अधिकारी बनाए गए प्रतिवादी

इस याचिका में राज्य सरकार के अलावा मुख्य सचिव, डीजीपी, पंचायत राज विभाग के सचिव और गृह मंत्रालय के एडीशनल चीफ सेक्रेट्री को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में लगभग ढाई लाख पंचायत प्रतिनिधि हैं, जिन्हें हथियार लाइसेंस देना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

नीतीश सरकार के फैसले पर बवाल

गौरतलब है कि पिछले महीने ही Nitish Government ने पंचायत प्रतिनिधियों को हथियार लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने का फैसला लिया था। सरकार का तर्क था कि कई बार पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी सुरक्षा के लिए हथियार की जरूरत पड़ती है, इसलिए यह निर्णय लिया गया।

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