पटना के 22 हजार ऑटो सर्टिफिकेट में जरूरी जोनल डाटा, हर ऑटो में क्यूआर कोड शामिल है

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Bihar News .8march 2026. 2.jpg (PC: BBN24/Social Media)

पटना:पटना शहर में ऑटो इंडस्ट्रीयल को स्थापित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। क्षेत्रीय परिवहन निगम (आरटीए) ने शहर में ऑटो के क्षेत्रीय आंकड़ों की संख्या 18 हजार से 22 हजार करने का निर्णय लिया है।

इसके अंतर्गत 19,800 ऑटो को नियमित क्षेत्रीय मानक और 2,200 को आरक्षित दस्तावेज़ दिया गया है।

2014 के बाद अब खुलागा डॉल का पिटारा

पटना शहर में ऑटो वाले सुपरमार्केट के लिए यह किसी भी बड़ी जीत से कम नहीं है। साल 2014 के बाद शहरी क्षेत्र से नए डॉक्युमेंट्री रिलीज करने के लिए जो इंटरव्यू लिया गया था, उसे अब हटाने का फैसला किया गया है।

नई व्यवस्था बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर ली गई है। हर ऑटो चालक को अपने जोन के तीन प्रमुख रूटों पर चुनाव का मौका मिलेगा। आवेदन के बाद आर्ट यह तय करना चाहता है कि किसे कौन सा रूट देना है। सबसे पहले उन दस्तावेज़ों को प्रमाणित किया गया है जिनके पास पुराना दस्तावेज़ है।

क्यूआर कोड से होगी पहचान

इस बार दस्तावेज़ में केवल कागज़ का टुकड़ा नहीं होगा, बल्कि हर ऑटो पर एक विशेष ‘क्यूआर कोड’ का उपयोग किया जाएगा। इस कोड को स्कैन करने के बाद ही गाड़ी के मालिक का नाम, इंजन और चेसिस नंबर, और इनपुट रूट की जानकारी मोबाइल स्क्रीन पर आएगी। इससे सीमेंट पुलिस के लिए अवैध रूप से दूसरे रूट में ऑटोमोबाइल वाले ऑटो को बेहद आसानी से चोरी करना संभव हो जाएगा।

साथ ही, यह तकनीक ऑटो स्टोरी की कहानियों को यात्रा में भी सहायता प्रदान करेगी। यात्री भी अब पूरी तरह से सुरक्षा के साथ यात्रा कर रहे हैं क्योंकि उन्हें पता चला है कि वे वैध और ट्रैक किए गए वाहनों में बैठे हैं।

अविश्वास से मुक्ति

वर्तमान में पटना की सड़कों पर ज्यादातर ऑटो या तो ग्रामीण आंकड़े चल रहे हैं या बिना किसी वैध शहरी उद्यमों के चल रहे हैं। इस कारण पुलिस प्लांट के दौरान इन दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जाता है।

अब इस नई जोनल व्यवस्था को लागू करने से उनका क्रियान्वयन पूरी तरह से कानूनी हो जाएगा। यह कदम केवल एक पैमाने पर आर्थिक स्थिति में सुधार लाएगा, बल्कि शहर के यातायात को भी एक मानकीकृत मानक में बांध देगा।

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