दिल्ली कार ब्लास्ट केस में बड़ा ट्विस्ट: आतंकी मॉड्यूल की फूट ने खोला हैरान करने वाला राज़

लाल किला कार बम विस्फोट की जांच में सामने आया आतंकी गुट के अंदर गहरी विचारधारात्मक लड़ाई और फंडिंग विवाद।

Rohit Mehta Journalist
Delhi Car Blast Case New Twist Terror Module Conflict
Delhi Car Blast Case New Twist Terror Module Conflict (PC: BBN24/Social Media)
मुख्य बातें (Highlights)
  • आतंकी मॉड्यूल में ISIS बनाम अल-कायदा विचारधारा को लेकर बड़ा विवाद
  • फंडिंग पर भी जबरदस्त टकराव, 20 लाख की क्राउडफंडिंग चर्चा में
  • काजीगुंड की ‘सीक्रेट मीटिंग’ के बाद हमला करने का फैसला तेज़

दिल्ली के लाल किला कार बम विस्फोट मामले की जांच में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के जिस मॉड्यूल ने इस आत्मघाती हमले की साजिश रची, उसके सदस्यों के बीच विचारधारा, फंड और हमले के तरीकों पर गहरे मतभेद मौजूद थे।
सबसे चौंकाने वाली बात— आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन नबी खुद अपने ही गुट से असहमत था और कई बार उनसे दूरी बनाए हुए था, यहां तक कि वह साथी सदस्य अदील राथर की शादी में भी नहीं गया।

विचारधारा का टकराव: ISIS बनाम अल-कायदा

जांच एजेंसियों के अनुसार, आतंकी मॉड्यूल में सबसे बड़ा विवाद विचारधारा को लेकर था।

🔹 डॉ. उमर ISIS से प्रभावित

  • ISIS की सोच: “करीबी दुश्मन को खत्म कर खिलाफत स्थापित करना”
  • उमर खुद को कश्मीर में बुरहान वानी और जाकिर मूसा की विचारधारा का उत्तराधिकारी मानता था।

🔹 बाकी सदस्य अल-कायदा समर्थक

  • अल-कायदा की प्राथमिकता: “दूर के दुश्मनों पर हमला और पश्चिमी संस्कृति के खिलाफ जंग”
  • वागे को छोड़कर बाकी सभी ने अफगानिस्तान जाकर जिहाद में शामिल होने की कोशिश भी की थी, लेकिन असफल रहे।

जांच अधिकारियों का बयान:

“उमर 2023 से लगातार IED बनाने की रिसर्च कर रहा था, जो उसकी कट्टर सोच की ओर इशारा करता है।”

फंडिंग पर विवाद: शाहीन शाहिद की संदिग्ध भूमिका

मॉड्यूल में दूसरा बड़ा झगड़ा पैसे को लेकर था।
सूत्रों के अनुसार, हमले की फंडिंग का बड़ा हिस्सा डॉ. शाहीन शाहिद अंसारी के जरिए आया था—

  • लगभग 20 लाख रुपये की क्राउडफंडिंग
  • JeM की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात से कथित संबंध
  • फरीदाबाद में विस्फोटक सामग्री जुटाने में मदद का संदेह

गुट के सदस्यों को उमर की जवाबदेही की कमी पर भी नाराजगी थी।

काजीगुंड की ‘सीक्रेट मीटिंग’ और हमले की प्लानिंग

अक्टूबर में इरफान वागे की गिरफ्तारी के बाद उमर को लगा कि गुट बिखर जाएगा।
इसी खतरे को देखते हुए उसने 18 अक्टूबर को काजीगुंड में एक गुप्त बैठक रखी।
जांच एजेंसियों के अनुसार:

  • इसी मीटिंग में हमला करने की सहमति बनी
  • दिल्ली ब्लास्ट इस बैठक के लगभग तीन हफ्ते बाद हुआ
  • उमर ने इसी बैठक में सभी को आत्मघाती हमले के लिए राज़ी किया

2,900 किलो IED सामग्री बरामद, दो सदस्य के पास चाबी

वागे की गिरफ्तारी ने पुलिस को बाकी मॉड्यूल तक पहुंचाया।
फरीदाबाद से बरामद हुआ:

  • 2,900 किलो IED बनाने की सामग्री
  • विस्फोटक
  • इलेक्ट्रॉनिक सर्किट
  • रसायन और रिमोट कंट्रोल

पुलिस के अनुसार:

“उमर और गनई के पास उस कमरे की चाबियां थीं जहां सारा सामान रखा था।”

यह पूरा मामला अब स्पष्ट कर रहा है कि आतंकी गुट के अंदर की फूट ने इस साजिश को दिशा भी दी और उजागर भी कर दिया।

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