बिहार के भागलपुर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पाकिस्तानी महिला इमराना खानम ने भारतीय पहचान छुपाकर न केवल शिक्षिका की नौकरी हासिल कर ली, बल्कि मतदाता पहचान पत्र बनवाकर वोट भी डाल डाला।
DSP की जांच में खुलासा
डीएसपी हेडक्वार्टर-2 मुहम्मद अयूब ने इमराना की पूरी जांच कर ली है। उन्होंने शिक्षा विभाग से स्पष्ट करने को कहा है कि किस आधार पर उसे शिक्षक की नियुक्ति दी गई और किस विज्ञापन से नौकरी मिली। साथ ही, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी से भी यह जानकारी मांगी गई है कि इमराना का वोटर आईडी कैसे बना। अब रिपोर्ट एसएसपी को सौंपी जाएगी।
असली पहचान पर सवाल
दरअसल, इमराना खानम ही बीबी इमराना खातून है, जो मूल रूप से कजरैली, सिमरिया की रहने वाली है। पति की मौत के बाद उसने भागलपुर के भीखनपुर टैंक क्षेत्र में मकान बनाकर रहना शुरू किया और नई पहचान के साथ सरकारी नौकरी हासिल कर ली।
2021 में खुली पोल
कुछ साल तक सब कुछ सामान्य चलता रहा, लेकिन 2021 में गृह विशेष विभाग की पहल पर इमराना की पाकिस्तानी पहचान उजागर हुई। तत्कालीन कजरैली और इशाकचक थानाध्यक्षों की जांच में पुष्टि हुई कि उर्दू मध्य विद्यालय बरहपुरा की शिक्षिका बीबी इमराना खातून ही पाकिस्तान की नागरिक इमराना खानम है।
अब तक सरकारी नौकरी और वोटिंग
चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तानी पहचान उजागर होने के बावजूद इमराना अब तक सरकारी नौकरी करती रही और भारतीय नागरिक के तौर पर चुनाव में वोट भी डालती रही।



