बिहार शहरी विकास एवं आवास विभाग ने पटना नगर निगम की मेयर सीता साहू को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि मेयर सात दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देतीं तो उनकी शक्तियां बिहार नगर पालिका अधिनियम की धारा 68(2) के तहत वापस ली जा सकती हैं।
विभागीय जांच में गंभीर आरोप
नोटिस से पहले हुई विभागीय जांच में मेयर पर आदेशों की अवहेलना और अवैध कार्यों के आरोप लगे हैं। जांच में पाया गया कि सीता साहू ने धारा 67A के अंतर्गत प्रतिबंध के बावजूद निगम बोर्ड की बैठक में विवादित प्रस्ताव संख्या 123, 124 और 125 को पास कराने की कोशिश की।
पार्षदों ने भी की शिकायत
नगर आयुक्त अनिमेष पराशर की चिट्ठी के बाद विभाग ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। वहीं कई पार्षदों—जिनमें विनय कुमार पप्पू, गीता देवी, डॉ. आशीष सिन्हा और डॉ. इंद्रदीप चंद्रवंशी शामिल हैं—ने भी मेयर के खिलाफ नियम उल्लंघन की शिकायत की है।
बैठकों में अनियमितताओं के आरोप
नोटिस में कहा गया है कि मेयर ने 11 जुलाई को स्पष्ट आदेशों के बावजूद विवादित प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा। इसके अलावा निगम बोर्ड और स्थायी समिति की बैठकों को बुलाने में भी गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। यहां तक कि आठवीं बोर्ड बैठक की फाइल 11 फरवरी को समय से पहले खोली गई, जिससे संदेह और गहराया।
किन प्रस्तावों पर बवाल?
जांच के दायरे में आए तीन प्रमुख प्रस्तावों में शामिल हैं:
- बिना बोर्ड की मंजूरी के किसी योजना को लागू करने पर रोक
- बोर्ड और स्थायी समिति द्वारा पास किए गए फैसलों को उनकी सहमति के बिना रद्द न करने का नियम
- अधिवक्ता प्रसून सिन्हा की बर्खास्तगी और नई कानूनी समिति का गठन
उपमेयर को मिल सकती हैं जिम्मेदारी
यदि मेयर का पद और शक्तियां छीन ली जाती हैं, तो प्रक्रिया के तहत उनकी जिम्मेदारी उपमेयर को सौंपी जा सकती है।


