नेपाल की सियासत इस समय भारी उथल-पुथल से गुजर रही है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ लगातार प्रदर्शन तेज होते जा रहे हैं। बीते दो दिनों में ही हिंसक घटनाओं में 24 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सरकार पूरी तरह दबाव में है।
इस्तीफों की सुनामी से हिली सरकार
सोमवार को गृह मंत्री रमेश लेखक ने इस्तीफा दिया, वहीं मंगलवार तक कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल, पेयजल मंत्री प्रदीप यादव और उप-प्रधानमंत्री प्रकाश मान सिंह समेत नेपाली कांग्रेस के लगभग सभी मंत्रियों ने अपने पद छोड़ दिए। इस सिलसिले में ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का, विदेश मंत्री डॉ. आरजू राणा देउबा और कई बड़े नेताओं ने भी इस्तीफा दे दिया है।
राष्ट्रपति और मंत्रियों के घर बने निशाना
काठमांडू समेत कई शहरों में हालात तनावपूर्ण हैं। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के निजी आवास पर कब्जा कर आग लगा दी। ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का के घर में आगजनी के दौरान सड़क पर नोट उड़ने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इसके अलावा गृहमंत्री, विदेश मंत्री और अन्य नेताओं के घरों को भी भीड़ ने नुकसान पहुंचाया।
सोशल मीडिया बैन से बढ़ा आक्रोश
सरकार द्वारा फेसबुक, X और यूट्यूब पर बैन लगाने के बाद युवाओं का गुस्सा और भड़क गया। संसद भवन के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध हुआ और प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए। सरकार ने भारी खून-खराबे और विरोध के बाद सोशल मीडिया से बैन हटाने का ऐलान कर दिया।
सर्वदलीय बैठक बुलाने पर मजबूर ओली
लगातार बिगड़ते हालात के बीच प्रधानमंत्री ओली ने आज शाम छह बजे सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि देश को स्थिर करने के लिए सभी दलों से संवाद जरूरी है। ओली ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि “यह कठिन समय है, धैर्य और संयम ही समाधान है।”


