काठमांडू में इन दिनों माहौल तनावपूर्ण है। सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ विरोध अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। हैरानी की बात यह है कि सोशल मीडिया बंद होने के बावजूद इतनी भीड़ कैसे जुटी और आंदोलन कैसे फैल गया।
ऐसे जुटाई गई भीड़
नेपाल सरकार ने कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। फिर भी प्रदर्शनकारियों ने टिकटॉक और वीपीएन (VPN) का सहारा लेकर संदेश फैलाया। टिकटॉक ने सरकार को सहयोग का भरोसा दिलाया, इसी वजह से यह पूरी तरह ब्लॉक नहीं हुआ। युवाओं ने इसे ही अपने आंदोलन का मुख्य हथियार बना लिया।
गुस्से की असली वजह क्या है?
लोगों का यह गुस्सा सिर्फ सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं है। इसकी जड़ें और गहरी हैं। हाल ही में ‘नेपो किड्स’ ट्रेंड सोशल मीडिया पर छाया हुआ था, जिसमें नेताओं के बच्चों की लग्जरी लाइफस्टाइल वायरल हो रही थी। इस ट्रेंड ने भ्रष्टाचार और नेपोटिज्म के खिलाफ आक्रोश को जन्म दिया। अब सोशल मीडिया बैन ने उस गुस्से को और भड़का दिया।
कहां से मिली प्रेरणा?
विरोध की यह लहर श्रीलंका और बांग्लादेश के जनआंदोलनों से प्रेरित बताई जा रही है। एक प्रदर्शनकारी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से कहा कि यह ट्रेंड फिलिपींस से आया, जहां टिकटॉक पर नेताओं के बच्चों की आलीशान जिंदगी के वीडियो वायरल हुए थे।
शुरुआत कैसे हुई?
नेपाल सरकार ने 4 सितंबर को “राष्ट्रहित” का हवाला देते हुए कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ब्लॉक किए। इसके खिलाफ ‘हामी नेपाल’ नामक संगठन ने औपचारिक रूप से विरोध की शुरुआत की। इस संगठन के साथ नाराज जनता और विपक्षी दल भी जुड़ गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन युवाओं के गुस्से और सरकार में बढ़ते अविश्वास का परिणाम है।



