पटना: बिहार की राजधानी पटना के गर्दनीबाग इलाके में बिहार राज्य मान्यता प्राप्त सांख्यिकी स्वयंसेवक (ASV) संघ के सैकड़ों सदस्य शुक्रवार से आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि 2016 में रद्द किए गए उनके नियोजन पैनल को तुरंत बहाल किया जाए और उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
यह आंदोलन उन हजारों स्वयंसेवकों का है, जिनका चयन 2012-13 में बिहार तकनीकी सेवा चयन आयोग (BTSSC) द्वारा आयोजित पात्रता परीक्षा पास करने के बाद हुआ था। उन्होंने राज्य सरकार के लिए आर्थिक गणना, पशु गणना, फसल कटनी अनुमान और स्वच्छता सर्वेक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए।
“12 साल से मांग रहे हैं न्याय, सिर्फ मिले हैं आश्वासन”
संघ के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार यादव, जो अनशन का नेतृत्व कर रहे हैं, ने बताया, “हमने 12 लंबे वर्षों में मुख्यमंत्री और हर संबंधित मंत्री को हमारी मांगों को लेकर सैकड़ों बार ज्ञापन दिया। लेकिन सरकार की तरफ से सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले, किसी ठोस समाधान की पहल नहीं हुई। हमारी हालत अब बहुत दयनीय हो चुकी है।”
उन्होंने आगे कहा, “सरकार ने बिना परीक्षा के टोला सेवक, विकास मित्र जैसे पदों पर लोगों को स्थाई नौकरियां दीं, लेकिन एक पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया पास करने वाले हम लोगों को सड़क पर छोड़ दिया गया। यह कैसा सुशासन है?”
चुनाव को लेकर सरकार को चेतावनी
आंदोलनकारियों ने सरकार को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा है कि अगर विधानसभा चुनाव से पहले उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे मतदान के मैदान में सत्ताधारी दल को मुंहतोड़ जवाब देंगे।
उन्होंने कहा, “हमारी मांग मान ली जाए तो हम एनडीए को वोट देंगे, नहीं तो वोट के बल पर सरकार गिरा देंगे।”
मुख्य मांगें
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- 2016 में रद्द किए गए पैनल की तत्काल बहाली।
- सभी योग्य स्वयंसेवकों का समायोजन।
- उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा और सभी संबंधित सुविधाएं दी जाएं।
- किए गए कार्यों के लिए घंटा अनुदान (मानदेय) का भुगतान।
इस आंदोलन में पंकज कुमार, राकेश, विजय, आभा कुमारी, रेखा पटेल, निसार अहमद और दिलीप कुमार सहित कई लोग शामिल हैं। उनका कहना है कि न्याय न मिलने पर वे मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्महत्या तक के कदम उठाने को मजबूर होंगे।


