बिहार में एक बार फिर अफसरशाही की मनमानी का मामला सुर्खियों में है। Katihar जिले के Barsoi प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) Hariom Sharan ने एक बेहद चौंकाने वाला पत्र लिखते हुए Sub Divisional Magistrate (SDM) Dikshit Shwetam पर लगातार मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
Hariom Sharan ने अपने चार पन्नों के इस्तीफे में साफ लिखा कि SDM उन्हें लगातार सार्वजनिक रूप से अपमानित करते थे, उनका मज़ाक उड़ाते थे और जानबूझकर टारगेट करते थे। यही नहीं, एक रात ड्यूटी के दौरान एक कर्मचारी के बेहोश हो जाने की घटना ने मामले को और भी गंभीर बना दिया।
एसडीएम का दबाव और रात में काम कराने की ज़िद
Hariom Sharan ने लिखा कि 8 जुलाई 2025 की रात SDM ने आदेश दिया कि सभी कर्मचारी रात में डिजिटाइजेशन का काम करें। बीडीओ ने समझाने की कोशिश की कि थके हुए कर्मचारियों से रात में काम कराना उचित नहीं होगा। लेकिन इसके बावजूद 65 कर्मचारियों को रोका गया। एक स्वच्छता पर्यवेक्षक दिलकश गनी मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा, जिसे अस्पताल भेजना पड़ा।
“रात में कैंप कराओ वरना नौकरी चली जाएगी”
9 जुलाई की रात SDM ने BDO को कॉल कर कहा कि वह “लापरवाह” हैं और “नौकरी नहीं रहेगी”। BDO ने बताया कि वो slip disc से पीड़ित हैं और कुछ देर आराम कर रहे हैं, लेकिन SDM ने उनकी बात को बहाना बता दिया और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
VC में किया गया सार्वजनिक अपमान
11 जुलाई को निर्वाचन कार्य की VC के दौरान SDM ने Hariom Sharan को सार्वजनिक रूप से कहा कि “आपका प्रखंड नहीं चल रहा है, चार्ज किसी और को दिलवाएंगे।” उन्होंने अन्य सभी अधिकारियों से कहा कि “ब्लॉक ऑफिसर किसी काम का नहीं है।”
BDO ने लिखा कि वह VC में मौजूद थे, लेकिन उनसे कोई बात तक नहीं की गई। लगातार अपमान से आहत होकर उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।
‘मैं अधिकारी बाद में हूं, पहले एक इंसान हूं’
अपने विस्तृत पत्र में Hariom Sharan ने लिखा:
“मैं पदाधिकारी बाद में हूं, पहले एक मनुष्य हूं। बिना किसी गलती के रोज़-रोज़ अपमानित होना मैं डिज़र्व नहीं करता।”
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने करियर में हमेशा समर्पण से काम किया है। उन्हें पहले Best AERO Award भी मिल चुका है। साथ ही वह निःशुल्क सिविल सेवा की कोचिंग भी देते रहे हैं।
सम्मानित अधिकारी को बना दिया गया विलेन?
BDO का आरोप है कि SDM उन्हें बार-बार “सुस्त”, “अयोग्य” और “कामचोर” कहकर नीचा दिखाते रहे। उन्होंने कहा कि एक बार डिजिटाइजेशन रिपोर्ट में जब उनके ब्लॉक का आंकड़ा सबसे अधिक आया, तब भी SDM ने बलरामपुर का श्रेय दिया और उनका कार्य दबाने की कोशिश की।
अब क्या करेगा प्रशासन?
अब सवाल यह है कि क्या Bihar सरकार इस गंभीर आरोप पर संज्ञान लेगी? क्या SDM के खिलाफ जांच होगी? और क्या एक ईमानदार अधिकारी की इस तरह की विदाई हमारे प्रशासनिक तंत्र की विफलता नहीं है?
यह इस्तीफा सिर्फ एक पत्र नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ एक चेतावनी है।



