नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) के आसपास का इलाका अब ऊंची इमारतों और मोबाइल टावर की नजर से सुरक्षित रहेगा। एयरपोर्ट के 20 किलोमीटर के दायरे में निर्माण कार्यों पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है। खासतौर पर एयरपोर्ट के चार किलोमीटर दायरे में अब कोई भी इमारत छह मंजिल से ऊंची नहीं बनाई जा सकेगी। इसके अलावा मोबाइल टावर भी इस सीमा में प्रतिबंधित कर दिए गए हैं।
5 जोन में बांटा गया एयरपोर्ट का क्षेत्र, नियम जानना जरूरी
एयरपोर्ट के आसपास के इलाके को पांच अलग-अलग जोन में बांटा गया है। हर जोन में निर्माण की ऊंचाई का स्पष्ट निर्धारण किया गया है। एएआई (Airports Authority of India) ने इसके लिए कलर कोडेड जोनिंग मैप जारी किया है, जिसके आधार पर निर्माण के लिए अनुमति मिल सकेगी। यमुना प्राधिकरण ने भी तय कर दिया है कि अब निर्माण के लिए नक्शा तभी पास होगा जब वह निर्धारित मानकों पर खरा उतरेगा। इसके साथ ही, 20 किलोमीटर के दायरे में किसी भी निर्माण के लिए NOC लेना अनिवार्य बना दिया गया है।
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एयरपोर्ट की चारदीवारी के पास सड़क और रेलवे पर भी सख्ती
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की चारदीवारी के एक किलोमीटर के दायरे में सड़क और रेलवे लाइन बनाने के लिए भी अब मंजूरी जरूरी होगी। रनवे के दोनों छोर, टेकऑफ और लैंडिंग क्षेत्र के पास करीब 1.5 किलोमीटर के दायरे में हाई टेंशन लाइन पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।
सितंबर से उड़ानें शुरू होने की उम्मीद, सुरक्षा पर पूरा फोकस
नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (Bureau of Civil Aviation Security – BCAS) ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। अनुमान है कि सितंबर 2025 से यहां से उड़ानें शुरू हो जाएंगी। प्रथम चरण में 1334 हेक्टेयर में दो रनवे प्रस्तावित हैं, जिसमें से पहला रनवे 3900 मीटर लंबा बन चुका है। दूसरा रनवे 4150 मीटर लंबा बनाया जाना बाकी है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (NIAL) के ओएसडी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि ऊंचाई को लेकर एएआई का जोनिंग मैप ही अंतिम होगा। समुद्र तल से एयरपोर्ट की औसत ऊंचाई 200 मीटर है, इस हिसाब से ही निर्माण की ऊंचाई तय होगी।



