मोहन भागवत बोले- भारत को तोड़ना चाहती हैं बुरी ताकतें, रिजीम चेंज से नहीं बदलेगा हालात

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Mohan Bhagwat Rss Centenary Regime Change India Unity
Mohan Bhagwat Rss Centenary Regime Change India Unity (PC: BBN24/Social Media)

Mohan Bhagwat News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव को संबोधित करते हुए भारत की एकता, सामाजिक बदलाव और दुनिया के अलग-अलग देशों में सत्ता परिवर्तन की कोशिशों पर अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें भारत, हिंदू समाज और संघ को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। भागवत के मुताबिक, केवल सत्ता या शासन व्यवस्था बदलने से समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

भारत को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं कुछ ताकतें: मोहन भागवत

नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि कुछ ताकतें भारत, हिंदू समाज और RSS को कमजोर करने के तरीके तलाश रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता हासिल करने की महत्वाकांक्षा और दूरदर्शिता की कमी के कारण कुछ नेता भी ऐसी कोशिशों का हिस्सा बन जाते हैं।

भागवत ने कहा कि भारत लगातार आगे बढ़ रहा है और पिछले कुछ दशकों में देश ने कई बड़े फैसले लिए हैं। उनके अनुसार, मजबूत नीतियों और नेतृत्व के कारण भारत की स्थिति में बदलाव आया है। उन्होंने दावा किया कि देश की प्रगति से कुछ ताकतें असहज हैं और इसलिए भारत को निशाना बनाने की कोशिश कर रही हैं।

रिजीम चेंज से सभी समस्याएं खत्म नहीं होंगी

अपने संबोधन में RSS प्रमुख ने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में हुए विरोध प्रदर्शनों तथा सत्ता परिवर्तन की कोशिशों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि रिजीम चेंज यानी सत्ता या शासन व्यवस्था बदलने से सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा, लेकिन उनके मुताबिक, ऐसा नहीं है।

भागवत ने आरोप लगाया कि दुनिया में सत्ता परिवर्तन की कुछ कोशिशों के पीछे ऐसे समूह सक्रिय हैं, जो अपने हितों और समर्थकों का दबदबा बनाए रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में भी इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।

आंदोलन का उद्देश्य समस्याओं का समाधान होना चाहिए

मोहन भागवत ने सामाजिक बदलाव और आंदोलनों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि केवल विरोध प्रदर्शन करने से समस्याओं का समाधान नहीं होता। इसके लिए समाज को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य समस्याओं को सुलझाना होना चाहिए। यदि आंदोलन के पीछे कोई दूसरा उद्देश्य आ जाता है, तो उसका इस्तेमाल राजनीतिक साधन के रूप में किया जा सकता है।

भागवत ने समाज के भीतर सुधार और लोगों की सोच में बदलाव को स्थायी परिवर्तन के लिए जरूरी बताया।

भावनात्मक एकता कमजोर हुई तो समाज भी कमजोर हुआ

देश की एकता पर जोर देते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि भारतीय समाज ने जब भावनात्मक एकता को भुलाना शुरू किया, तभी से उसकी कमजोरी बढ़ी।

उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग भाषाओं, धर्मों, जातियों और परंपराओं को मानने वाले लोग रहते हैं। इसके बावजूद विविधताओं के बीच एक समाज के रूप में जुड़े रहना भारत की पहचान रही है।

भागवत ने विविधताओं को स्वीकार करने और उनकी रक्षा करने की जरूरत बताई। उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में लिखे शब्दों ‘हम भारत के लोग’ का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, ये शब्द देश के लोगों के बीच साझा पहचान और भावनात्मक संबंध को दर्शाते हैं।

‘विचार बोइए, तो कर्म की फसल काटेंगे’

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में अच्छे विचारों, अनुशासन और चरित्र निर्माण का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा, ‘विचार बोइए, तो कर्म की फसल काटेंगे; चरित्र बोएंगे तो प्रारब्ध का निर्माण होगा।’

इस संदेश के जरिए उन्होंने विचारों और कर्मों के बीच संबंध पर जोर दिया। उनके अनुसार, व्यक्ति के विचार उसके काम को प्रभावित करते हैं, जबकि उसके व्यवहार और लगातार किए गए अच्छे काम से चरित्र का निर्माण होता है।

उन्होंने जीवन में अच्छे संस्कार, अनुशासन और जिम्मेदारी निभाने को महत्वपूर्ण बताया।

RSS के 100 साल के सफर का किया उल्लेख

संघ के शताब्दी वर्ष के समापन समारोह में मोहन भागवत ने संगठन के पिछले 100 वर्षों के कामकाज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान संघ ने लोगों के भीतर आत्मबोध जगाने और भारतीय समाज को उसकी पहचान, परंपराओं तथा जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी। संगठन राष्ट्र निर्माण, अनुशासन और चरित्र विकास को अपने प्रमुख उद्देश्यों में शामिल करता है।

संघ और उससे जुड़े संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा तथा आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में भी काम करते रहे हैं। संघ के स्वयंसेवक बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों में हिस्सा लेते हैं।

विजयादशमी पर मोहन भागवत ने की शस्त्र पूजा

नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित विजयादशमी समारोह की शुरुआत पारंपरिक शस्त्र पूजन से हुई। मोहन भागवत ने पूजा-अर्चना के बाद RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित की।

विजयादशमी का दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए विशेष महत्व रखता है। इसी दिन संगठन की स्थापना हुई थी। इस अवसर पर हर साल नागपुर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

जगदीप धनखड़ समेत कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद

RSS के शताब्दी वर्ष के समापन समारोह में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।

कार्यक्रम में मोहन भागवत ने अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रीय एकता, सामाजिक जिम्मेदारी, चरित्र निर्माण और स्थायी बदलाव के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया।

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