बिहार चुनाव से पहले सबसे बड़ी वोटर क्लीनिंग! हर सीट से हटेंगे 25 हजार नाम, किस नेता की कुर्सी खतरे में?

2025 विधानसभा चुनाव से पहले 61 लाख वोटरों का नाम हटाने की तैयारी, कई सीटों पर उलटफेर तय, राजनीतिक दलों में हड़कंप

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Bihar Voter List Purification Before Election 2025
Bihar Voter List Purification Before Election 2025 (Source: BBN24/Google/Social Media)
मुख्य बातें (Highlights)
  • विधानसभा चुनाव से पहले हट सकते हैं 61.1 लाख वोटरों के नाम
  • हर सीट से औसतन 25,144 नाम होंगे गायब
  • 2020 में कई सीटें 1,000 से भी कम वोटों से हारीं थीं पार्टियाँ

बिहार विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और उससे पहले एक बड़ा प्रशासनिक कदम सियासत को हिला देने वाला है। राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) चल रहा है, जिसके तहत 61.1 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। इस प्रक्रिया का सीधा असर 243 विधानसभा क्षेत्रों पर पड़ेगा, क्योंकि औसतन हर सीट से 25,144 नाम हटा दिए जाएंगे।

चुनाव आयोग के आंकड़े चौंकाने वाले

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के मुताबिक, अब तक राज्य में 7.9 करोड़ वोटरों में से 7.21 करोड़ के फॉर्म डिजिटलाइज हो चुके हैं। केवल 7 लाख लोगों ने अभी तक अपना गणना प्रपत्र जमा नहीं किया है। आयोग का दावा है कि 99% मतदाताओं तक संपर्क कर लिया गया है।

इस क्लीनिंग के पीछे जो आंकड़े सामने आए हैं, वे भी सोचने पर मजबूर कर देते हैं:

  • 21.6 लाख मतदाता अब इस दुनिया में नहीं हैं
  • 31.5 लाख स्थायी रूप से बिहार से बाहर चले गए हैं
  • 7 लाख दो जगह वोटर के रूप में दर्ज हैं
  • 1 लाख का कोई अता-पता नहीं मिला

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विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा सीधा असर

विशेषज्ञों की मानें तो यह प्रक्रिया बिहार के आगामी चुनावों में बड़ा उलटफेर ला सकती है। 2020 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर बेहद कम वोटों से हार-जीत हुई थी:

  • 11 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत का अंतर 1,000 से भी कम था
  • 35 सीटों पर 3,000 से कम वोटों का फासला था
  • 52 सीटों पर यह अंतर 5,000 से भी कम था

इसका मतलब यह है कि अगर वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटते हैं, तो राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं

विपक्ष ने उठाए सवाल, बताया जल्दबाज़ी

राजद और कांग्रेस सहित विपक्षी महागठबंधन ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह कार्य जल्दबाज़ी में किया गया चुनावी हथकंडा है।

महागठबंधन को 2020 में इन क्षेत्रों में बेहद कम अंतर से हार मिली थी:

  • 27 सीटें 5,000 से कम वोटों से
  • 18 सीटें 3,000 से कम वोटों से
  • 6 सीटें सिर्फ 1,000 वोटों के भीतर

अब जब चुनाव करीब हैं, इस तरह की वोटर क्लीनिंग से चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठना लाज़मी है।


राजनीतिक दलों की टेंशन स्वाभाविक है क्योंकि वोटरों की यह छंटनी कई सीटों पर खेल पलट सकती है। क्या यह प्रशासनिक कार्रवाई है या चुनावी रणनीति? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन बिहार की राजनीति में भूचाल तय है।

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