पटना: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से चरमरा गई है। बुधवार (17 सितंबर) से राज्यभर के सभी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार कर दिया है। पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH), नालंदा मेडिकल कॉलेज, दरभंगा मेडिकल कॉलेज (DMCH) समेत सभी बड़े संस्थानों में OPD (Out Patient Department) और OT (Operation Theatre) सेवाएं पूरी तरह बंद हैं।
मरीजों पर भारी असर
इमरजेंसी सेवाएं फिलहाल चालू हैं, लेकिन सामान्य मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केवल PMCH में ही 5,000 से अधिक अपॉइंटमेंट रद्द हो गए। डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए इंटर्न्स और सीनियर फैकल्टी को अतिरिक्त ड्यूटी पर लगाया गया है, लेकिन बढ़ता बोझ स्थिति को गंभीर बना रहा है।
जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख मांगें
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, सेवाएं बंद रहेंगी। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- बॉन्ड पोस्टिंग की अवधि को सीनियर रेजिडेंसी में शामिल किया जाए।
- वेतन वृद्धि और बकाया वेतन का भुगतान।
- मेरिट-कम-च्वाइस आधारित पोस्टिंग।
- कोविड-19 सेवा को बॉन्ड अवधि में मान्यता।
JDA के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हरेंद्र कुमार का कहना है कि “हमारे साथ लगातार भेदभाव हो रहा है। सुपर स्पेशलिटी कोर्स करने वाले डॉक्टरों को राहत देने के लिए सरकार को सीनियर रेजिडेंट को बॉन्ड सेवा मानना चाहिए।”
पुरानी लड़ाई और सरकार की प्रतिक्रिया
यह विवाद नया नहीं है। फरवरी 2025 में भी PMCH में हड़ताल से OPD सेवाएं ठप हुई थीं। 2019 और 2020 में भी जूनियर डॉक्टरों ने वेतन वृद्धि और बॉन्ड नीति में ढील की मांग को लेकर आंदोलन किया था। राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में भी इसी तरह की मांगों को लेकर हड़तालें हो चुकी हैं।
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि सरकार डॉक्टरों की मांगों पर विचार कर रही है और जल्द ही बातचीत के लिए बुलाया जाएगा। वहीं, JDA ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
यह हड़ताल एक बार फिर बिहार की स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरियों को उजागर कर रही है—डॉक्टरों की कमी, संसाधनों का अभाव और सरकार की उदासीनता। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।



