Strait of Hormuz Crisis: पाकिस्तान के जरिए ईरान का ऑफर, क्या कम होगा मिडिल ईस्ट तनाव?

Iran Us Two Stage Peace Plan Strait Of Hormuz
Iran Us Two Stage Peace Plan Strait Of Hormuz (PC: BBN24/Social Media)

Strait Of Hormuz: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Iran ने Pakistan के जरिए United States को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्ताव में जंग को खत्म करने और दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को दोबारा खोलने की बात कही गई है.

ट्रंप की बातचीत को लेकर शर्तें

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में कहा था कि अगर ईरान बातचीत करना चाहता है, तो उसे सीधे संपर्क करना चाहिए. हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
इस बीच व्हाइट हाउस द्वारा अपने दूतों का इस्लामाबाद दौरा रद्द करना भी दोनों देशों के बीच तनाव का संकेत माना जा रहा है.

यूरेनियम संवर्धन पर अटका मामला

अमेरिका चाहता है कि ईरान कम से कम 10 साल तक यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) रोक दे और अपना न्यूक्लियर स्टॉक विदेश भेज दे.
वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi का कहना है कि इन शर्तों पर देश के भीतर अभी सहमति नहीं बन पाई है. यही मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है.

क्या है ईरान का टू-स्टेज प्लान?

ईरान के इस नए प्रस्ताव में दो चरणों की रणनीति रखी गई है:

  • पहला चरण: समुद्री तनाव को कम करना और अमेरिका द्वारा की गई नेवल नाकेबंदी को हटाना
  • दूसरा चरण: इसके बाद न्यूक्लियर मुद्दों पर औपचारिक बातचीत शुरू करना

ईरान का कहना है कि पहले व्यापारिक रास्ते सामान्य किए जाएं, खासकर होर्मुज स्ट्रेट को खोलना जरूरी है. इसके बाद ही आगे की बातचीत संभव है.

क्या खुल सकता है होर्मुज?

हालांकि White House को यह प्रस्ताव मिल चुका है, लेकिन अमेरिका इस पर सहमत होगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
अगर यह प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो न सिर्फ मिडिल ईस्ट में तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक तेल सप्लाई भी सामान्य हो सकती है, जिससे महंगाई पर असर पड़ेगा.

वैश्विक असर और बढ़ती महंगाई

हाल के महीनों में क्षेत्र में हुए सैन्य तनाव के कारण तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है.
Strait of Hormuz पर किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. यही वजह है कि सभी देशों की नजर इस मुद्दे पर टिकी हुई है.

दोनों देशों के बीच अब भी गहरी खाई

ईरान जहां सुरक्षा गारंटी और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत चाहता है, वहीं अमेरिका का फोकस उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम, मिसाइल विकास और क्षेत्रीय प्रभाव को सीमित करने पर है.
इन अलग-अलग प्राथमिकताओं के चलते दोनों देशों के बीच समझौता आसान नहीं दिख रहा.

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