मां बगलामुखी क्यों खींचती हैं शत्रु की जीभ? जानें पौराणिक रहस्य

Baglamukhi Jayanti 2026 Why Goddess Pulls Tongue
Baglamukhi Jayanti 2026 Why Goddess Pulls Tongue (PC: BBN24/Social Media)

Baglamukhi Jayanti 2026: 24 अप्रैल को मनाई जाने वाली बगलामुखी जयंती के अवसर पर भक्तों के मन में एक सवाल अक्सर उठता है मां Baglamukhi को चित्रों में शत्रु की जीभ खींचते हुए क्यों दिखाया जाता है? इसके पीछे गहरा पौराणिक और आध्यात्मिक अर्थ छिपा है.

मां बगलामुखी का अद्भुत स्वरूप

मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक प्रमुख देवी मानी जाती हैं. उन्हें ‘पीतांबरा’ भी कहा जाता है, क्योंकि उनका स्वरूप पीले (स्वर्णिम) रंग का होता है. उनके एक हाथ में शत्रु की जीभ होती है और दूसरे हाथ में गदा—यह रूप उनके ‘स्तंभन शक्ति’ का प्रतीक है.

पौराणिक कथा क्या कहती है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में एक भयंकर तूफान ने पूरी सृष्टि को संकट में डाल दिया. उसी समय मदन नाम का एक असुर था, जिसे कठोर तपस्या के बाद ‘वाक्-सिद्धि’ का वरदान मिला था.

इस वरदान के कारण वह जो भी बोलता, वह सच हो जाता. धीरे-धीरे उसने इस शक्ति का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया और अपनी वाणी से विनाश फैलाने लगा.

जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तब Vishnu ने सौराष्ट्र क्षेत्र में तपस्या की. उनकी तपस्या से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई वही मां बगलामुखी थीं.

जीभ खींचने का रहस्य

जब मां बगलामुखी का सामना मदन असुर से हुआ, तो वह अपनी वाणी से विनाशकारी मंत्र बोलने लगा. उसी समय मां ने अपनी ‘स्तंभन शक्ति’ का प्रयोग किया और उसकी जीभ पकड़कर बाहर खींच ली.

जैसे ही असुर की जीभ पकड़ी गई, उसकी सारी शक्ति खत्म हो गई, क्योंकि उसकी ताकत उसकी वाणी में ही थी.

इसका आध्यात्मिक अर्थ

मां बगलामुखी द्वारा शत्रु की जीभ खींचने का मतलब सिर्फ शारीरिक दंड नहीं है, बल्कि यह कई गहरे संदेश देता है:

  • वाणी पर नियंत्रण: गलत और कटु वचनों को रोकना
  • शत्रु का स्तंभन: विरोधी की नकारात्मक शक्ति को निष्क्रिय करना
  • सत्य की रक्षा: झूठ और कुतर्क का अंत
  • आंतरिक शुद्धि: अहंकार, क्रोध और लोभ जैसे आंतरिक शत्रुओं पर नियंत्रण

आध्यात्मिक दृष्टि से ‘जीभ’ हमारे विचारों और वाणी का प्रतीक है. मां बगलामुखी साधक के भीतर के नकारात्मक तत्वों को शांत कर आत्मज्ञान की ओर मार्ग दिखाती हैं.

क्यों मनाई जाती है बगलामुखी जयंती?

बगलामुखी जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. इस दिन मां की विशेष पूजा करने से शत्रुओं पर विजय, न्याय में सफलता और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा मिलने की मान्यता है.

Share This Article
Exit mobile version