ओडिशा के कोरापुट ज़िले में विजिलेंस विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जयपुर वन रेंज के डिप्टी रेंजर-कम-इन-चार्ज रामचंद्र नायक के छह ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में नायक के जयपुर स्थित फ्लैट से ₹1.44 करोड़ नकद, 1.5 किलो सोना और 4.5 किलो चांदी बरामद की गई।
नोट गिनने के लिए मंगवानी पड़ी मशीनें
जांच अधिकारियों के मुताबिक नकदी की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि उसे गिनने के लिए नोट गिनने की मशीनें मंगवानी पड़ीं। साथ ही तिजोरी से कई जमीनों के कागजात भी बरामद हुए, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि नायक के पास अघोषित संपत्ति का बड़ा जखीरा है।
76 हजार सैलरी में करोड़ों की संपत्ति कैसे?
रामचंद्र नायक की वर्तमान मासिक सैलरी ₹76,880 (सकल) और ₹69,680 (शुद्ध) है। ऐसे में उनके पास ₹1.44 करोड़ की नकद राशि और कीमती धातुओं की मौजूदगी ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है। यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय से कई गुना अधिक है, जिससे यह मामला आय से अधिक संपत्ति का बनता है।
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ग्राम वन कार्यकर्ता से करोड़पति बनने तक का सफर
नायक ने अपनी सेवा 9 मार्च 1989 को कोरापुट की सोशल फॉरेस्ट्री डिवीजन में एक ग्राम वन कार्यकर्ता (Village Forest Worker) के रूप में शुरू की थी। बाद में सोशल फॉरेस्ट्री डिवीजन का टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन में विलय हो गया और उन्हें जयपुर स्थानांतरित कर दिया गया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि सरकारी वेतन पर काम करने वाले नायक के पास इतनी संपत्ति कैसे आई?
विजिलेंस टीम के पास हैं पुख्ता सबूत
विजिलेंस विभाग के अनुसार, छापेमारी के दौरान जुटाए गए दस्तावेज और डिजिटल सबूतों के आधार पर रामचंद्र नायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही विभाग उनकी संपत्ति के अन्य स्रोतों की भी जांच कर रहा है।


