मोहन भागवत बोले- ट्रिलियन इकॉनमी नहीं, धर्म और अध्यात्म बनाएंगे भारत को विश्वगुरु

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में कहा, भारत की असली ताकत उसकी आध्यात्मिकता और धर्म में है, न कि केवल आर्थिक विकास में।

Mohan Bhagwat India Vishwaguru Through Spirituality Not Economy
Mohan Bhagwat India Vishwaguru Through Spirituality Not Economy (Source: BBN24/Google/Social Media)

महाराष्ट्र के नागपुर में एक मंदिर दर्शन के बाद आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत की पहचान केवल उसकी आर्थिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसकी आध्यात्मिकता और धर्म से है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वगुरु बनने का मार्ग ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी से नहीं, बल्कि अध्यात्म और धार्मिक मूल्यों से होकर जाता है।

भागवत ने कहा, “दुनिया भारत को उसके आध्यात्मिक ज्ञान के लिए जानती और मानती है। अमेरिका, चीन जैसे देश आर्थिक रूप से मजबूत हैं, लेकिन उनके पास वह अध्यात्म और धर्म नहीं है जो भारत के पास है। यही दो बातें हमें विश्वगुरु बनाती हैं।”

“ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी से नहीं होगा असर”

भागवत ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर भारत 3 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी भी बन जाए, तो यह कोई अनोखी बात नहीं होगी क्योंकि कई देश यह उपलब्धि पहले ही हासिल कर चुके हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया के पास संसाधन, ताकत और तकनीक है, लेकिन आध्यात्मिकता और धर्म भारत की अनोखी पहचान है।”

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अच्छाई बांटने और बुराई रोकने की सीख

अध्यात्म में आगे बढ़ने के तरीकों पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा, “सिर्फ त्योहार मनाने और पूजा करने से काम नहीं चलेगा। हमें भगवान शिव की तरह निर्भय बनना होगा। जो भी अच्छाई हमारे पास है, उसे सबके साथ बांटना चाहिए।”

उन्होंने चेताया कि बुराई को फैलने नहीं देना चाहिए और नकारात्मकता को अपने भीतर समाप्त करना चाहिए। “जब हम अच्छाई बांटते हैं और दूसरों के लिए जीते हैं, तभी भारत सच्चे मायने में महान बनता है,” उन्होंने कहा।

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