प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को मुलाकात की। बैठक के बाद पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत-चीन संबंधों को किसी तीसरे देश के लेंस से देखने की आवश्यकता नहीं है। इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए सीधा संदेश माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की। इसमें आतंकवाद, वैश्विक व्यापार और निष्पक्ष व्यापारिक माहौल जैसे मुद्दे शामिल रहे।
एससीओ सम्मेलन से इतर अहम वार्ता
यह मुलाकात 31वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। खास बात यह रही कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल आयात करने पर भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद पीएम मोदी जापान और चीन की यात्रा पर निकले। चीन की यह यात्रा सात साल बाद हो रही है, ऐसे में इसका खास महत्व है।
मतभेद को झगड़े में न बदलने की अपील
विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी और शी ने कहा कि मतभेद को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। दोनों नेताओं ने वैश्विक व्यापार में अपनी अर्थव्यवस्थाओं की अहम भूमिका स्वीकार की और सीमा विवाद का आपसी समाधान खोजने की बात कही।
रिश्तों में नई मजबूती पर जोर
दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन विकास के भागीदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं। आपसी सम्मान और सहयोग के आधार पर स्थिर संबंध जरूरी हैं। साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा को दोबारा शुरू करने और सीधी उड़ानों को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी।



