महागठबंधन की नवनिर्वाचित विधायकों की अहम बैठक में तेजस्वी प्रसाद यादव को शनिवार को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इसके साथ ही वह एक बार फिर बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका निभाएंगे।
1 दिसंबर से शुरू होने वाले सत्र में उन्हें आधिकारिक तौर पर विपक्ष का नेता घोषित किया जाएगा।
महागठबंधन की बैठक में उठे चुनाव हार के सवाल
बैठक में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में मिली हार पर खुलकर चर्चा हुई। गठबंधन के नेताओं ने माना कि बिहार में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में हुई गड़बड़ियां चुनाव परिणामों पर बड़ा असर डालती दिखीं।
राजद विधायक भाई बीरेंद्र ने बैठक के बाद मीडिया से कहा:
“तेजस्वी को सर्वसम्मति से नेता चुना गया है। उनके पास विपक्ष का नेता बनने के लिए आवश्यक समर्थन मौजूद है।”
कांग्रेस के विधान पार्षद समीर कुमार सिंह ने भी अपनी बात रखते हुए कहा:
“विपक्ष आने वाले समय में सदन में और मज़बूती से आवाज़ उठाएगा। एसआईआर की प्रक्रिया ने चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।”
सीटों का पूरा गणित: किसके खाते में कितनी सीटें?
महागठबंधन (Total: 35 Seats)
- राजद (RJD): 25
- कांग्रेस: 06
- भाकपा-माले: 02
- माकपा: 01
- इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी (IIP): 01
एनडीए गठबंधन (Total: 202 Seats)
- भारतीय जनता पार्टी (BJP): 89
- जदयू: 85
- लोजपा (रामविलास): 19
- हम: 05
- रालोमो: 04
➡️ कुल 202 सीटों के साथ नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए ने सरकार बनाई।
बुलेट पॉइंट्स में कहानी एक नज़र में
- तेजस्वी यादव को एकमत से नेता चुना जाना राजनीतिक संकेतों से भरपूर माना जा रहा है
- विपक्ष ने एसआईआर की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए
- 1 दिसंबर से सदन में नए तेवरों के साथ उतरने की तैयारी
- एनडीए ने बहुमत के साथ सरकार बना ली, लेकिन विपक्ष दावा कर रहा है कि लड़ाई अभी बाकी
- बिहार की राजनीति में एक बार फिर टकराव के तेज संकेत
कहने को सब कुछ तैयार… अब नज़रें 1 दिसंबर पर
तेजस्वी यादव के एक बार फिर विपक्ष के नेता बनने के साथ बिहार की राजनीति में नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।
अब सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि सदन में विपक्ष किस तरह सरकार को घेरता है और आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति किस दिशा में बढ़ती है।


