पटना: शुक्रवार को पटना नगर निगम की सामान्य बैठक अचानक अखाड़ा बन गई, जब मेयर Sita Sahu के समर्थन वाले गुट और विरोधी पार्षदों के बीच गरमागरम बहस ने विकराल रूप ले लिया। आरोप-प्रत्यारोप के बीच मामला गाली-गलौज और हाथापाई तक पहुंच गया, और देखते ही देखते पार्षदों के कुर्ते फटने लगे।
मीटिंग की अध्यक्षता कर रहीं मेयर सीता साहू के सामने यह हंगामा हुआ, जब उनके गुट ने एक अहम प्रस्ताव को जल्दबाज़ी में पास कराने की कोशिश की। इस पर विरोधी खेमे ने तीखी आपत्ति जताई और बैठक में बवाल शुरू हो गया।
नियमों को नजरअंदाज कर लाया गया एजेंडा?
निगम आयुक्त Animesh Parashar ने साफ तौर पर विरोध दर्ज करते हुए कहा कि मेयर गुट का एजेंडा नियमों के खिलाफ था। उनके अनुसार, एजेंडा की स्वीकृति से पहले प्रक्रिया में चर्चा अनिवार्य होती है, लेकिन उसे नज़रअंदाज़ कर सीधे प्रस्ताव लाया गया। यही बात विपक्षी पार्षदों को नागवार गुज़री और बैठक का माहौल बिगड़ गया।
विपक्षी गुट के अनुसार, प्रस्ताव में एक ऐसी एजेंसी को नगर निगम के काम में शामिल करने का दबाव था, जिस पर पहले से भ्रष्टाचार के आरोप लगे हुए हैं। इसी मुद्दे पर गरमागरम बहस के बाद मामला हाथापाई और वॉकआउट तक पहुंच गया।
वॉकआउट और दो पार्षदों को हटाया गया
जब माहौल बेकाबू हुआ तो विरोधी पार्षद नारेबाज़ी करते हुए बैठक से वॉकआउट कर गए। बैठक को बीच में ही स्थगित करना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दो पार्षदों को बैठक से बाहर कर दिया गया।
मेयर Sita Sahu ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा, “मैं 2017 से पद पर हूं, लेकिन ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा। पार्षदों का यह व्यवहार दर्शाता है कि कुछ लोग केवल विकास कार्यों में बाधा डालना चाहते हैं।”
बैठक में कौन-कौन मौजूद थे?
इस अहम बैठक में डिप्टी मेयर Rashmi Chandravanshi, नगर आयुक्त Animesh Parashar, मेयर Sita Sahu और सभी गुटों के पार्षद मौजूद थे। अब इस बवाल के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।



