पटना के Bapu Auditorium में Teachers’ Day के मौके पर मशहूर शिक्षा विशेषज्ञ खान सर (Khan Sir) का जलवा देखने को मिला। हज़ारों छात्रों से खचाखच भरे इस ऑडिटोरियम में जब “लीडर कैसा हो? खान सर जैसा हो” के नारे लगे तो माहौल तालियों से गूंज उठा।
अस्पताल से किसानों तक: खान सर का विज़न
खान सर ने अपने भाषण में छात्रों को अस्पताल प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए कहा,
“मेरे अस्पताल में मरीज को ‘पेशेंट’ नहीं बल्कि ‘गेस्ट’ कहा जाएगा। हम चाहते हैं कि यहां पढ़े छात्र डॉक्टर बनें और आगे चलकर इसी अस्पताल में सेवा दें।”
उन्होंने आगे बताया कि भविष्य में उनका अगला फोकस किसानों के लिए काम करना होगा।
डॉ. सुब्रह्मण्यम शर्मा का सम्मान
इस कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद् सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पोते डॉ. सुब्रह्मण्यम शर्मा का भी सम्मान किया गया। जब छात्रों ने मोबाइल फ्लैशलाइट से उनका स्वागत किया, तो शर्मा भावुक होकर बोले—
“मुझे कभी बिहार और पटना के बाहर इतनी मोहब्बत नहीं मिली। शायद मैंने कुछ अच्छा किया है जो इतना प्यार मिला।”
गुरु-शिष्य परंपरा का उत्सव
इस समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम और छात्रों के आभार संदेशों ने गुरु-शिष्य परंपरा की झलक दिखाई। छात्रों ने खुलकर कहा कि उनकी शैक्षणिक सफलता के पीछे खान सर का मार्गदर्शन है।
नतीजा: कक्षा से बाहर बढ़ता प्रभाव
Teachers’ Day का यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि यह संदेश भी था कि खान सर अब शिक्षा से आगे बढ़कर समाज सेवा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। अस्पताल परियोजना से लेकर किसानों के लिए काम करने का उनका संकल्प इस बात का संकेत है कि उनका प्रभाव क्लासरूम से कहीं आगे तक जा चुका है।



