बिहार में BPSC पास कराने के नाम पर 40 लाख की डील, महिला दारोगा और JDU नेता समेत पांच पर केस

Bihar Bpsc Bribery Case Woman Si Jdu Leader Eou Investigation
Bihar Bpsc Bribery Case Woman Si Jdu Leader Eou Investigation (PC: BBN24/Social Media)

Bihar News: बिहार में BPSC परीक्षा में पास कराने और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 40 लाख रुपये की कथित घूस लेने का मामला सामने आया है. इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने जांच शुरू कर दी है. आरोप है कि एक महिला दारोगा ने अपने बेटे को BPSC परीक्षा में सफल कराने के लिए डॉक्टर दंपती को मोटी रकम दी थी.

पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी

EOU ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत पटना जिला बल की सब-इंस्पेक्टर आशा सिंह, उनके बेटे रितेश कुमार उर्फ सोनू, डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार, उनकी पत्नी डॉ. रजनी और उनके पिता ब्रजकिशोर प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है.

बताया जा रहा है कि डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार पहले RJD के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं और वर्तमान में JDU के प्रदेश महासचिव हैं.

40 लाख रुपये लेकर सफलता की गारंटी का आरोप

प्राथमिकी के मुताबिक, कृष्णा डेंटल अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर दंपती ने रितेश कुमार को BPSC परीक्षा में सफलता दिलाने की गारंटी दी थी. इसके बदले कथित तौर पर 40 लाख रुपये नकद एडवांस लिए गए.

हालांकि जब BPSC की मेरिट लिस्ट में रितेश कुमार का नाम नहीं आया, तब विवाद शुरू हो गया.

25 लाख का चेक हुआ बाउंस

आरोप है कि बाद में डॉक्टर दंपती ने 25 लाख रुपये लौटाने के लिए चेक दिया, लेकिन हस्ताक्षर मेल नहीं खाने के कारण चेक बाउंस हो गया. वहीं बाकी 15 लाख रुपये लौटाने का आश्वासन भी पूरा नहीं किया गया.

इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया और जक्कनपुर थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया गया.

पुराने पारिवारिक संबंधों से हुई थी पहचान

रितेश कुमार ने प्राथमिकी में बताया कि उनके परिवार के डॉक्टर धर्मेंद्र के पिता ब्रजकिशोर प्रसाद से पुराने संबंध थे. उनकी मां आशा सिंह अक्सर उनके घर जाया करती थीं. इसी दौरान BPSC परीक्षा की तैयारी को लेकर बातचीत हुई और डॉक्टर दंपती से संपर्क स्थापित हुआ.

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद तेज हुई जांच

डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार ने अगस्त 2025 में पटना हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया था कि 40 लाख रुपये नकद कहां से आए और इसकी जांच अब तक क्यों नहीं की गई.

इसके बाद मामले की जांच और तेज कर दी गई.

महिला दारोगा ने दिया लोन का हवाला

पुलिस की पूछताछ में महिला दारोगा आशा सिंह ने बताया कि उन्होंने SBI की मौर्यालोक शाखा से हाउसिंग लोन, पर्सनल लोन और अपनी बचत मिलाकर करीब 22 लाख रुपये बेटे को दिए थे.

फिलहाल आर्थिक अपराध इकाई पूरे मामले की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे हो सकते हैं.

Share This Article
Exit mobile version