Bakrid 2025: बिहार में ‘सलमान’ और ‘आमिर’ बकरों की धूम, 91 हजार में बिका सुपरस्टार बकरा

बकरीद से पहले पटना और बख्तियारपुर में मवेशी हाट गुलजार, सलमान और आमिर नाम के बकरे बने भीड़ के केंद्र, जानिए इस त्योहार का इतिहास और धार्मिक महत्व।

Bakrid 2025 Bakra Salman Aamir Sold Bihar Market
(Image Source: Social Media Sites)

पटना: इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार बकरीद (Eid-ul-Azha) इस वर्ष 7 जून 2025 को मनाया जाएगा। बकरीद सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि ईमान, त्याग और इंसानियत का प्रतीक है। बिहार में इस त्योहार को लेकर जबरदस्त उत्साह है। खासकर बख्तियारपुर मवेशी हाट में इस बार चर्चा का केंद्र रहे दो खास बकरे—‘Salman’ और ‘Aamir’

हजरत इब्राहिम की कुर्बानी से जुड़ी है बकरीद की परंपरा

इस त्योहार की ऐतिहासिक और धार्मिक पृष्ठभूमि पैगंबर हजरत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) की आज़माइश से जुड़ी है। अल्लाह ने इब्राहिम से उनके सबसे प्यारे बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी मांगी। इब्राहिम ने अपनी आंखों पर पट्टी बांधी और अल्लाह की आज्ञा मानकर छुरी चलाई, लेकिन अल्लाह ने उनकी नीयत देखकर इस्माइल की जगह एक भेड़ (दुंबा) भेज दिया। तब से हर साल मुसलमान बकरीद पर कुर्बानी करते हैं।

कुर्बानी: केवल बलिदान नहीं, ईमान की परीक्षा

बकरीद पर दी जाने वाली कुर्बानी का उद्देश्य केवल जानवर को मारना नहीं, बल्कि यह दर्शाना है कि एक मुसलमान अल्लाह के हुक्म के लिए अपनी सबसे प्रिय वस्तु तक को त्याग सकता है। यह ईमान की पराकाष्ठा है।

मांस का वितरण: इंसानियत और समानता का संदेश

कुर्बानी के बाद मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है:

  1. पहला हिस्सा खुद के लिए
  2. दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए
  3. तीसरा गरीबों और ज़रूरतमंदों के लिए

इसका उद्देश्य है समाज में बराबरी और सेवा की भावना को मजबूती देना।

सलमान और आमिर नाम के बकरे बने सेलिब्रिटी

बख्तियारपुर के मवेशी हाट में इस बार दो बकरों ने सभी का ध्यान खींचा:

  • Salman Goat: ₹91,000 में बिका
  • Aamir Goat: ₹51,000 में बिका

इन बकरों की कीमत उनकी कद-काठी, चमकदार रंग, शांत स्वभाव और ट्रेनिंग के आधार पर तय हुई थी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इन बकरों के साथ सेल्फी लेने के लिए उतावला दिखा।

ज़िल-हिज्जा और हज यात्रा का महत्व

बकरीद, इस्लामी पंचांग के आखिरी महीने ज़िल-हिज्जा की 10वीं तारीख को मनाई जाती है। यही वह समय होता है जब लाखों मुसलमान हज यात्रा पर मक्का-मदीना जाते हैं। अराफात की यात्रा और काबा का तवाफ करते हैं।

हजरत इब्राहिम की सुन्नत: हर मुसलमान पर कुर्बानी वाजिब

धार्मिक विद्वान मु. लुकमान अली बताते हैं कि कुर्बानी करना केवल परंपरा नहीं बल्कि हजरत इब्राहिम की सुन्नत है, जिसे अल्लाह ने हर सक्षम मुसलमान के लिए वाजिब कर दिया है। यह त्याग की पराकाष्ठा और अल्लाह के प्रति सम्पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।

निष्कर्ष:
बकरीद केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यह त्याग, सेवा और समानता का संदेश है। सलमान और आमिर जैसे बकरों की लोकप्रियता जहां त्योहार की उत्सुकता को दर्शाती है, वहीं इसका धार्मिक महत्व समाज को जोड़ने का कार्य करता है।

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