इस्लामाबाद में पाकिस्तान की सियासत और आतंक का गजब खेल सामने आया है। एक तरफ देश बाढ़ से बेहाल है और सरकार दुनिया से राहत राशि मांग रही है। वहीं दूसरी तरफ उसी मदद के पैसों का इस्तेमाल आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) को मजबूत करने में किया जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर में तबाह हुआ था मरकज
करीब पांच महीने पहले भारतीय सेना ने “ऑपरेशन सिंदूर” (Operation Sindoor) के तहत लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय यानी मरकज को ध्वस्त कर दिया था। इस कार्रवाई में मस्जिद जैसी संरचना के तीन अहम हिस्से तबाह हुए थे, जिनमें हथियार जमा करने, ट्रेनिंग और आतंकी कैडरों के ठहरने की व्यवस्था थी।
बाढ़ फंड से फिर खड़ा हो रहा लश्कर का अड्डा
सूत्रों के मुताबिक 18 अगस्त से मरकज को दोबारा बनाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 4 सितंबर से यहां भारी मशीनों के जरिए मलबा हटाने का काम किया गया और अब नई मस्जिद के निर्माण की तैयारी चल रही है।
पाक सरकार का आतंकियों को खुला समर्थन
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी सरकार ने मई में साफ ऐलान किया था कि सभी आतंकी संगठनों के तबाह ठिकानों को फिर से तैयार किया जाएगा। इसके तहत 14 अगस्त को लश्कर को पहली किश्त के रूप में 4 करोड़ पाकिस्तानी रुपए भी दिए गए। जबकि पूरे मरकज को बनाने में करीब 15 करोड़ पाकिस्तानी रुपए खर्च होने का अनुमान है।


