महिलाएं बाइक पर एक तरफ क्यों बैठती हैं? जानिए सदियों पुरानी परंपरा की कहानी

Women Sitting Sideways On Bike History Reason
Women Sitting Sideways On Bike History Reason (PC: BBN24/Social Media)

भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों में अक्सर महिलाएं बाइक या स्कूटर पर पीछे बैठते समय दोनों पैर एक ही तरफ रखकर बैठती हैं। यह दृश्य इतना आम है कि ज्यादातर लोग इसके पीछे की वजह जानने की कोशिश ही नहीं करते।

दिलचस्प बात यह है कि यह तरीका किसी ट्रैफिक नियम या वैज्ञानिक कारण से नहीं जुड़ा, बल्कि इसकी जड़ें सदियों पुराने सामाजिक नियमों और यूरोपीय परंपराओं में छिपी हैं। हाल ही में बाइक राइडर और कंटेंट क्रिएटर Zenith Irfan ने इस परंपरा के इतिहास को लेकर चर्चा शुरू की, जिसके बाद यह विषय सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

मध्यकालीन यूरोप से शुरू हुई परंपरा

इतिहासकारों के मुताबिक महिलाओं के साइड में बैठने की शुरुआत दक्षिण एशिया में नहीं, बल्कि मध्यकालीन यूरोप में हुई थी। उस समय राजघरानों की महिलाएं घोड़ों पर दोनों पैर एक तरफ रखकर बैठती थीं।

उस दौर में महिलाओं का पुरुषों की तरह घोड़े पर बैठना सामाजिक रूप से उचित नहीं माना जाता था। इसलिए “साइड-सैडल राइडिंग” को महिलाओं के लिए शालीन और सम्मानजनक तरीका माना गया।

बताया जाता है कि Anne of Bohemia जैसी शाही हस्तियां भी इसी अंदाज में यात्रा करती थीं।

ब्रिटिश शासन के साथ भारत पहुंची यह आदत

जब ब्रिटिश शासन भारत आया, तो उनके साथ कई सामाजिक परंपराएं और रहन-सहन के तरीके भी यहां पहुंचे। धीरे-धीरे महिलाओं के साइड में बैठने की आदत भी भारतीय समाज में शामिल हो गई।

बाद में जब मोटरसाइकिल और स्कूटर आम हुए, तो यही तरीका वाहनों पर भी अपनाया जाने लगा। समय के साथ यह एक सामाजिक आदत बन गई, जिसे कई पीढ़ियों ने बिना सवाल किए अपनाया।

रानी लक्ष्मीबाई का उदाहरण बताता है अलग कहानी

भारतीय इतिहास में कई महिलाएं ऐसी रही हैं जिन्होंने पुरुषों की तरह घोड़े पर बैठकर युद्ध लड़ा। Rani Lakshmibai इसका सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती हैं।

इससे साफ होता है कि भारतीय महिलाएं पारंपरिक रूप से दोनों तरफ पैर रखकर सवारी करने में सक्षम थीं। लेकिन औपनिवेशिक प्रभाव और सामाजिक सोच ने धीरे-धीरे साइड में बैठने की छवि को ज्यादा स्वीकार्य बना दिया।

आज भी क्यों जारी है यह परंपरा?

आधुनिक दौर में भी कई महिलाएं बाइक पर साइड में बैठना पसंद करती हैं। इसके पीछे कई कारण माने जाते हैं, जैसे—

  • साड़ी या सलवार जैसे कपड़ों की सुविधा
  • पारिवारिक और सामाजिक संस्कार
  • शालीनता की पारंपरिक सोच
  • बचपन से सीखी आदत

हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों तरफ पैर रखकर बैठना ज्यादा सुरक्षित और संतुलित हो सकता है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस विषय को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कई लोगों ने माना कि वे अब तक इसे सिर्फ भारतीय परंपरा समझते थे, जबकि इसकी जड़ें यूरोप के इतिहास से जुड़ी हुई हैं।

यह चर्चा दिखाती है कि हमारी रोजमर्रा की कई आदतों के पीछे गहरा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रभाव छिपा होता है।

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