पटना: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व आज, 22 सितंबर 2025 से आरंभ हो गया है। आस्था और शक्ति की उपासना के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस बार माता का आगमन हाथी पर हुआ है, जिसे समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। पर्व का समापन 2 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन रावण दहन और अच्छाई की बुराई पर विजय के संदेश के साथ होगा।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
आचार्य पं. रमाशंकर तिवारी के अनुसार, पटना क्षेत्र में कलश स्थापना का शुभ समय सुबह 6:09 से 8:06 बजे तक है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:49 से 12:38 बजे तक रहेगा। इन मुहूर्तों में विधिवत पूजा करने से साधक को मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद मिलता है।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। मां शैलपुत्री वृषभ पर सवार होकर हाथ में त्रिशूल और कमल धारण किए रहती हैं। इन्हें स्थिरता, धैर्य और शक्ति की देवी माना जाता है।
भक्त इस दिन मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर पुष्प, जल, अक्षत और दुग्ध से पूजा करते हैं। पूजा के दौरान ‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जप विशेष फलदायी माना गया है।
मां दुर्गा का आगमन और विदाई
पं. तिवारी ने बताया कि इस बार माता का आगमन हाथी पर हुआ है, जो सुख-समृद्धि का प्रतीक है। वहीं, विदाई नर वाहन से होगी, जिसे शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे समाज में सकारात्मकता और समरसता का संचार होता है।


