देवघर में आस्था का महासागर! पहली सोमवारी पर उमड़ा भक्तों का रेला, 3 KM लंबी कतार, प्रशासन अलर्ट

सावन की पहली सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में उमड़ी रिकॉर्ड भीड़, पूरी रात गूंजता रहा हर-हर महादेव, प्रशासन की सुरक्षा में कोई चूक नहीं

Deoghar Sawan First Monday Crowd 2025
Deoghar Sawan First Monday Crowd 2025 (Source: BBN24/Google/Social Media)

देवघर: सावन की पहली सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि मंदिर परिसर से लेकर बीएड कॉलेज तक करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार लग गई। रविवार देर रात से कांवरियों का आगमन शुरू हो गया था, जो सोमवार की सुबह तक लगातार जारी रहा। हर दिशा से हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष गूंजते रहे।

आधी रात खुला बाबा बैद्यनाथ का पट, शुरू हुआ जलाभिषेक

रविवार तड़के 3:05 बजे बाबा बैद्यनाथ का पट खोला गया। इसके साथ ही कांचा जल और प्रातः कालीन पूजा संपन्न हुई, जो रात 10 बजे तक चलती रही। पहले ही दिन करीब 1.5 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया। बाह्रा अरघा में भी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते दिखे।

बाबा नगरी में गेरूआ रंग, सड़कें बनीं श्रद्धा की राह

पूरी बाबा नगरी को दुल्हन की तरह सजाया गया था। चारों ओर गेरूआ रंग में रंगे कांवरिये, भक्ति में डूबे नजर आए। कतार में खड़े भक्तों की जुबां पर हर वक्त ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे रहे।

देवघर जिला प्रशासन ने इस भारी भीड़ को संभालने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। पूरे जिले में भीड़ प्रबंधन के लिए दो आईपीएस, 44 डीएसपी, 96 थाना प्रभारी, 127 सब इंस्पेक्टर और हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। वहीं NDRF और SDRF की टीमें भी विभिन्न स्थानों पर मुस्तैद रहीं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ली स्थिति की जानकारी

इस दौरान मुख्यमंत्री Hemant Soren ने पूर्व सीएम Raghubar Das से मुलाकात कर Shibu Soren के स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री कार्यालय भी स्थिति पर नजर रखे हुए है।

देवघर डीसी ने सोशल मीडिया पर श्रद्धालुओं की भीड़ और प्रशासन की व्यवस्थाओं की जानकारी साझा की।

@DCDeoghar: बाबा बैद्यनाथ के दरबार में श्रद्धालुओं का त्याग और समर्पण अद्वितीय है। @JharkhandCMO @BaidyanathDhaam @prdjharkhand @VisitJharkhand

सुरक्षा व्यवस्था बनी बड़ी चुनौती

प्रशासन के लिए रविवार और सोमवार का दिन सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इन दो दिनों में सबसे अधिक कांवरिये जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। यही वजह है कि सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर इस बार खास सतर्कता बरती गई है।

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