‘भारत अब सोने की चिड़िया नहीं, शेर बनेगा’ – मोहन भागवत का बड़ा ऐलान

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कोच्चि में छात्रों से कहा– अब भारत को ताकतवर बनना होगा, सिर्फ नौकरी नहीं, शिक्षा का लक्ष्य है आत्मनिर्भरता और संस्कार।

Rss Chief Mohan Bhagwat Speech On Education In Kochi
Rss Chief Mohan Bhagwat Speech On Education In Kochi (Source: BBN24/Google/Social Media)
मुख्य बातें (Highlights)
  • भागवत बोले– शिक्षा का मकसद सिर्फ नौकरी नहीं, जीवन मूल्यों से जोड़ना है
  • भारत को वैश्विक सम्मान के लिए शक्ति प्रदर्शन जरूरी
  • ‘भारत’ को ‘India’ कहने से होती है सांस्कृतिक गरिमा की हानि

27 जुलाई को केरल के कोच्चि में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित शिक्षा सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि “अब भारत को ‘सोने की चिड़िया’ नहीं, बल्कि ‘शेर’ बनना है।” उनका यह बयान शिक्षा के स्वरूप और राष्ट्र की पहचान को लेकर एक गहरी सोच को दर्शाता है।

भागवत बोले– शिक्षा आत्मनिर्भर और नैतिक बनाना सिखाए

भागवत ने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का जरिया नहीं होनी चाहिए। इसका उद्देश्य व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना, कठिन परिस्थितियों में दृढ़ रहना और समाज के लिए योगदान देने लायक बनाना होना चाहिए। उन्होंने प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि वह दूसरों के लिए जीने और बलिदान की भावना को बढ़ावा देती थी।

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“स्वार्थ बढ़ाए तो शिक्षा अधूरी मानी जाएगी”

आरएसएस प्रमुख ने आधुनिक शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर शिक्षा केवल स्वार्थ की भावना को बढ़ाए, तो वह सच्ची शिक्षा नहीं मानी जा सकती। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि शिक्षा का काम व्यक्ति को केवल आर्थिक रूप से सक्षम बनाना नहीं, बल्कि नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जोड़ना है।

‘भारत’ को ‘India’ कहने से उसकी आत्मा खोती है

अपने भाषण में भागवत ने ‘भारत’ शब्द की महत्ता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि ‘भारत’ कोई आम शब्द नहीं, बल्कि एक व्यक्तिवाचक संज्ञा है, जिसका भावनात्मक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है। इसे ‘India’ में अनुवादित करना इसकी गरिमा को कम करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई देश अपनी पहचान खो देता है, तो वह दुनिया में कितना भी अच्छा क्यों न हो, उसे सम्मान और सुरक्षा नहीं मिल सकती।

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