Assembly Election 2026: देश में लोकतंत्र का पर्व एक बार फिर पूरे उत्साह के साथ मनाया गया, जहां बिहार और तमिलनाडु में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा झारखंड की रही, जहां एक सीट पर 95 प्रतिशत से अधिक मतदान ने सभी को चौंका दिया।
बिहार, तमिलनाडु और झारखंड में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान संपन्न हो गया है। बिहार की 243, तमिलनाडु की 234 और झारखंड की 81 सीटों पर वोट डाले गए। इसमें बिहार में 71.80%, तमिलनाडु में 74.60% और झारखंड में 82.30 फीसदी मतदान हुआ। हालांकि, अंतिम आंकड़े अभी आना बाकी हैं। 2021 के चुनाव के मुकाबले इस बार झारखंड में मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस बार साहिबगंज क्षेत्र में सबसे ज्यादा 95.12 फीसदी मतदान हुआ, जबकि राज्य में सबसे कम मतदान 65.20 फीसदी दर्ज किया गया।
बिहार और तमिलनाडु में जबरदस्त मतदान
बिहार और तमिलनाडु में मतदाताओं ने उत्साह के साथ मतदान किया और कई जगहों पर पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं, जो देर शाम तक जारी रहीं। युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर लोकतंत्र के इस महापर्व में भाग लिया।
झारखंड ने सबको छोड़ा पीछे
जहां बिहार और तमिलनाडु में अच्छा मतदान हुआ, वहीं झारखंड की एक सीट ने नया कीर्तिमान स्थापित किया। यहां 95% से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया, जो देश में सबसे अधिक मतदान प्रतिशत में शामिल हो गया है।
क्यों बढ़ रहा है मतदान प्रतिशत?
विशेषज्ञों के अनुसार, मतदाताओं में बढ़ती जागरूकता, चुनाव आयोग की सक्रिय पहल और स्थानीय मुद्दों का प्रभाव मतदान प्रतिशत बढ़ने की बड़ी वजह है। इसके अलावा सोशल मीडिया अभियान और युवाओं की भागीदारी ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है।
लोकतंत्र की मजबूती का संकेत
उच्च मतदान प्रतिशत यह दर्शाता है कि देश के नागरिक अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग हो रहे हैं। यह लोकतंत्र की मजबूती और जनता के विश्वास का स्पष्ट संकेत है। अब सभी की निगाहें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो कई राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
ड्रोन से निगरानी, तकनीक का इस्तेमाल
इस बार चुनाव में तकनीक का व्यापक इस्तेमाल देखने को मिला। कई संवेदनशील मतदान केंद्रों पर ड्रोन से निगरानी की गई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। चुनाव आयोग की इस पहल की काफी सराहना की जा रही है।



