असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने संदिग्ध विदेशियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नया Standard Operating Procedure (SOP) लागू कर दिया है। इस SOP के तहत अब जिला उपायुक्त संदिग्ध व्यक्तियों को नोटिस जारी कर 10 दिनों के भीतर अपनी नागरिकता साबित करने का मौका देंगे। यदि सबूत संतोषजनक नहीं पाए गए, तो सीधे निकासी आदेश (Eviction Order) जारी किया जाएगा।
SOP के तहत क्या है प्रावधान?
मुख्यमंत्री सरमा ने कैबिनेट मीटिंग के बाद कहा कि यह SOP विदेशी न्यायाधिकरण (Foreigners’ Tribunal) की जगह सीधे जिला उपायुक्तों को अधिकार देता है।
- संदिग्ध व्यक्ति को 10 दिन का नोटिस मिलेगा।
- निर्धारित समय में दस्तावेज संतोषजनक न होने पर हिरासत केंद्र (Detention Centre) भेजा जाएगा।
- इसके बाद BSF उन व्यक्तियों को बांग्लादेश या पाकिस्तान डिपोर्ट करेगी।
विधानसभा में हुई थी घोषणा
जून 2025 में ही मुख्यमंत्री सरमा ने विधानसभा में यह घोषणा की थी कि असम में Immigrants (Expulsion from Assam) Act, 1950 को फिर से लागू किया जाएगा। यह वही कानून है जिसे 1950 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने तैयार किया था।
विदेशी न्यायाधिकरण की भूमिका होगी कम
नए SOP से विदेशी न्यायाधिकरणों की भूमिका काफी हद तक निष्प्रभावी हो जाएगी। केवल वही मामले न्यायाधिकरण के पास जाएंगे जहां जिला मजिस्ट्रेट प्रथम दृष्टया निर्णय नहीं ले पाएंगे।
क्यों हुआ था IEAA एक्ट पर रोक?
हालांकि 1950 में लागू यह कानून उसी साल रोक दिया गया था। नेहरू सरकार ने तत्कालीन सीएम गोपीनाथ बारदोलोई को निर्देश दिया था कि लियाकत-नेहरू समझौते के तहत इस एक्ट का इस्तेमाल न किया जाए। तब से यह अधिनियम निष्क्रिय था, जिसे अब फिर से लागू किया गया है।


