Plastic Currency: 14 साल बाद फिर चर्चा में पॉलिमर नोट, कागजी नोटों की जगह ले सकते हैं नए नोट

Rohit Mehta Journalist
Rbi Plastic Notes Polymer Currency India Pilot Project
Rbi Plastic Notes Polymer Currency India Pilot Project (PC: BBN24/Social Media)

भारत में जल्द ही प्लास्टिक के नोट देखने को मिल सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपने करीब 14 साल पुराने पॉलिमर नोट (Plastic Notes) प्रस्ताव को फिर से आगे बढ़ाने पर विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरबीआई की हाल की बोर्ड बैठकों में प्लास्टिक नोटों को लेकर चर्चा हुई है और जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा की जा सकती है।

वर्तमान में भारत में विशेष प्रकार के कागज से बने नोटों का इस्तेमाल होता है। हालांकि, इन नोटों की उम्र सीमित होती है और हर साल बड़ी संख्या में नोट खराब होने के कारण उन्हें बदलना पड़ता है। इसी वजह से आरबीआई लंबे समय से पॉलिमर नोटों के विकल्प पर विचार कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2012 में भी सरकार ने कोच्चि, मैसूरु, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला में 10 रुपये के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन तकनीकी और परिचालन चुनौतियों के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब इन चुनौतियों को काफी हद तक दूर कर लिया गया है।

प्लास्टिक या पॉलिमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत उनकी लंबी उम्र है। ये नोट कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होते हैं, नमी और गंदगी से कम प्रभावित होते हैं तथा इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर जोड़े जा सकते हैं। माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम और विशेष स्याही जैसी तकनीकों के कारण इनकी नकल करना भी मुश्किल होता है।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में करेंसी नोट छापने का खर्च 6,372.8 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। वहीं बड़ी संख्या में खराब नोटों को भी चलन से बाहर करना पड़ा। ऐसे में पॉलिमर नोट लंबे समय में लागत कम करने और नोटों की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

दुनिया के करीब 60 देशों में पहले से ही प्लास्टिक नोटों का उपयोग किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया इस तकनीक को अपनाने वाला पहला देश था। इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया और न्यूजीलैंड समेत कई देशों ने भी पॉलिमर करेंसी को अपनाया है।

हालांकि आरबीआई की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अगर पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलती है तो भारतीय मुद्रा व्यवस्था में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

Share This Article