एक ही रात मां की गोद से उठी दोनों बेटियों की लाश! सांप काटा या झाड़-फूंक ने ली जान?

कटिहार में मां के साथ सो रही दो बहनों को सांप ने डसा, इलाज की जगह झाड़-फूंक में गंवाई जानें, डॉक्टर भी रह गए बेबस

Two Sisters Died Snakebite Katihar Bihar
Two Sisters Died Snakebite Katihar Bihar (Source: BBN24/Google/Social Media)

बिहार के कटिहार जिले से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जहां एक ही रात में मां की गोद से उसकी दोनों बेटियां मौत के मुंह में चली गईं। घटना डंडखोरा थाना क्षेत्र के रायपुर पंचायत स्थित गोरफर गांव की है। बीते रविवार देर रात स्वर्गीय चंद्रदेव उरांव की दोनों बेटियां ज्योति रानी (27) और शीतल कुमारी (23) अपनी मां माया देवी के साथ घर में सो रही थीं। इसी दौरान अचानक बिछावन में सांप घुस आया और दोनों बहनों को डंस लिया।

पहली बहन के चिल्लाने की आवाज सुनते ही घर में हड़कंप मच गया। परिजन डर गए और गांव के ही ओझा-बैगा के पास झाड़-फूंक कराने पहुंच गए। लेकिन जब तक परिजन इलाज के लिए जागरूक होते, तब तक दोनों बहनों की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी।

इलाज से ज्यादा भरोसा झाड़-फूंक पर, जान बचाने की हर कोशिश नाकाम

ग्रामीण अंधविश्वास में डूबे रहे और कीमती समय झाड़-फूंक में बीतता गया। जब हालत ज्यादा बिगड़ गई तो दोनों को देर रात कटिहार सदर अस्पताल लाया गया। वहां डॉक्टरों ने तीन घंटे इलाज के बाद दोनों को हायर सेंटर रेफर कर दिया।

इसके बाद परिजन पूर्णिया मेडिकल कॉलेज, फिर वहां से भागलपुर मेडिकल कॉलेज, और फिर से कटिहार मेडिकल कॉलेज ले गए। इस भागदौड़ में बड़ी बेटी ज्योति रानी ने दम तोड़ दिया। छोटी बहन शीतल कुमारी का इलाज जारी रहा, लेकिन उसे भी हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिजन उसे पूर्णिया के एक निजी नर्सिंग होम ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

रोते-रोते मां ने कहा- ‘अगर पिता होते तो बेटियों का ये हाल नहीं होता’

दोनों बेटियों की मौत से मां माया देवी बदहवास हैं। उनका कहना है कि रातभर दौड़ती रही, लेकिन कहीं भी सही इलाज नहीं मिला। डॉक्टर हर जगह सिर्फ रेफर करते रहे। उन्होंने दुख जताते हुए कहा- “अगर बच्चों के पिता होते तो शायद बेटियों की जान बच जाती।” चार साल पहले ही उनके पति का निधन हो गया था।

गांव में दहशत का माहौल, डॉक्टर और सिस्टम पर उठे सवाल

गांव में इस हादसे के बाद दहशत और शोक का माहौल है। साथ ही इलाज में लापरवाही और झाड़-फूंक पर भरोसा करने की मानसिकता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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