PM Shram Yogi Mandhan Yojana: बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना शुरू की है। इस योजना के तहत 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थियों को हर महीने 3,000 रुपये पेंशन मिलती है। इसके बावजूद बिहार में इस योजना से जुड़ने वाले मजदूरों की संख्या अपेक्षा से काफी कम है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में 49.61 लाख से अधिक श्रमिकों ने योजना में पंजीकरण कराया है, जबकि बिहार में यह संख्या केवल 2.38 लाख है। वहीं, राज्य में असंगठित क्षेत्र के कामगारों की संख्या 3.26 करोड़ से अधिक बताई गई है।
बिहार में करोड़ों मजदूर, लेकिन सिर्फ 2.38 लाख रजिस्ट्रेशन
प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना के तहत देशभर में अब तक 49 लाख 61 हजार से अधिक असंगठित कामगार पंजीकरण करा चुके हैं।
पटना में 51 दिनों से धरने पर बिहार पुलिस ड्राइवर भर्ती के अभ्यर्थी, थाली पीटकर जताया विरोधवहीं, बिहार में केवल 2 लाख 38 हजार श्रमिक ही इस योजना से जुड़े हैं। राज्य में असंगठित क्षेत्र के 3.26 करोड़ से अधिक कामगार होने के बावजूद योजना का लाभ लेने वालों की संख्या काफी कम है।
ये आंकड़े बताते हैं कि बिहार में बड़ी संख्या में असंगठित कामगारों तक योजना का लाभ पहुंचाना अभी भी एक चुनौती है।
सरकार भी जमा करती है मजदूरों के बराबर पैसा
प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देना है।
Siwan Blast: सीवान विस्फोट में 5 मौतों के बाद थानाध्यक्ष और चौकीदार सस्पेंड, FSL टीम करेगी जांचइस योजना की खास बात यह है कि इसमें लाभार्थी जितना मासिक अंशदान करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके पेंशन खाते में जमा करती है।
योजना के तहत 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थी को आजीवन हर महीने 3,000 रुपये पेंशन देने का प्रावधान है।
18 से 40 साल के मजदूर उठा सकते हैं लाभ
इस योजना का लाभ 18 से 40 वर्ष की उम्र के असंगठित क्षेत्र के कामगार उठा सकते हैं। इसके लिए उनकी मासिक आय 15,000 रुपये से कम होनी चाहिए।
योजना के दायरे में आने वाले कामगारों में शामिल हैं:
- घरेलू कामगार
- रिक्शा चालक
- मोची और दर्जी
- बढ़ई
- कृषि मजदूर
- बीड़ी बनाने वाले श्रमिक
- निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर
हालांकि, EPFO, ESIC या NPS के सदस्य इस योजना के पात्र नहीं हैं।
शुरुआती दो वर्षों के बाद घटती गई योजना की रफ्तार
बिहार में प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना को लेकर शुरुआती दो वर्षों में अपेक्षाकृत अधिक दिलचस्पी देखने को मिली थी। लेकिन इसके बाद पंजीकरण की रफ्तार लगातार धीमी होती गई।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
| वित्तीय वर्ष | पंजीकरण कराने वाले श्रमिक |
|---|---|
| 2018-19 | 1,08,134 |
| 2019-20 | 75,341 |
इन दो वर्षों के बाद योजना से जुड़ने वाले कामगारों की संख्या में गिरावट आई। रिपोर्ट के मुताबिक, बाद के वर्षों में मुश्किल से 10 हजार कामगार ही सालाना पंजीकरण करा पाए।
बिहार के मजदूर योजना से दूरी क्यों बना रहे हैं?
बिहार में असंगठित कामगारों की बड़ी आबादी होने के बावजूद योजना में कम पंजीकरण एक अहम सवाल है। उपलब्ध रिपोर्ट में इसके पीछे किसी एक निश्चित कारण का उल्लेख नहीं किया गया है।
हालांकि, पंजीकरण की शुरुआती तेजी के बाद लगातार गिरावट यह दिखाती है कि योजना को लेकर जागरूकता और श्रमिकों की भागीदारी बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है।
योजना के लाभ और अंशदान की जानकारी अधिक से अधिक मजदूरों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि पात्र कामगार बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा के इस विकल्प को समझ सकें।
60 साल के बाद हर महीने मिलेगी 3,000 रुपये पेंशन
प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में नियमित आय का सहारा देना है। इसके तहत पात्र कामगार और केंद्र सरकार बराबर अंशदान करते हैं। 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये पेंशन मिलती है।
बिहार में 3.26 करोड़ से अधिक असंगठित कामगारों के मुकाबले अब तक केवल 2.38 लाख पंजीकरण होना बताता है कि राज्य में इस योजना की पहुंच बढ़ाने की जरूरत है।

