पटना जू बना गैंडे का वैश्विक गढ़, संख्या में दुनिया में दूसरा स्थान

10 गैंडों और नए ब्रीडिंग सेंटर के साथ पटना जू ने हासिल की अंतरराष्ट्रीय पहचान

Patna Zoo Rhino Population World Ranking
Patna Zoo Rhino Population World Ranking (PC: BBN24/Social Media)

पटना का संजय गांधी जैविक उद्यान (Patna Zoo) इन दिनों सुर्खियों में है। यहां गैंडों की संख्या अब 10 तक पहुंच गई है, जिसमें 6 नर और 4 मादा शामिल हैं। इसी वजह से पटना जू दुनिया में गैंडे की सबसे बड़ी आबादी वाले सैन डिएगो जू (San Diego Zoo, USA) के बाद दूसरे स्थान पर आ गया है। हाल ही में यहां एक समर्पित गैंडा ब्रीडिंग सेंटर की भी शुरुआत हुई है, जो संरक्षण कार्य को और मजबूती देगा।

1979 से शुरू हुई थी गैंडा संरक्षण की यात्रा

पटना जू की गैंडा संरक्षण यात्रा 1979 में शुरू हुई थी, जब असम से “कंचा” और “कंची” नामक गैंडों की जोड़ी लाई गई थी। 1982 में पश्चिम चंपारण (बेतिया) से बचाए गए “राजू” ने इस जोड़ी का साथ दिया। 1988 में राजू और कंची के मेल से “हदताली” नामक मादा गैंडे का जन्म हुआ, जिसने पटना जू की पहली बड़ी सफलता दर्ज की।

इसके बाद 1993 में “राजा” और 1997 में “बजरंगी” का जन्म हुआ। इस प्रजनन ने साबित किया कि पटना जू गैंडों के लिए सुरक्षित और उपयुक्त माहौल प्रदान कर रहा है।

जेनेटिक डाइवर्सिटी के लिए बाहरी गैंडों का योगदान

गैंडों की नस्ल को मजबूत बनाए रखने के लिए समय-समय पर अन्य चिड़ियाघरों से भी गैंडे लाए गए।

  • 2005 में दिल्ली जू से “अयोध्या” नामक नर गैंडा आया।
  • 2007 में सैन डिएगो जू (USA) से “गैरी” और उसका बच्चा “लाली” पटना पहुंचे।

इनके शामिल होने से नस्ल की गुणवत्ता और भी बेहतर हुई और संरक्षण मिशन को मजबूती मिली।

आज भी जारी है संरक्षण की सफलता कहानी

आज पटना जू न सिर्फ गैंडा संरक्षण में बल्कि वन्यजीव शिक्षा में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यहां का ब्रीडिंग सेंटर और सुरक्षित प्रबंधन गैंडों की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। पर्यटक यहां दुनिया की सबसे बड़ी गैंडा आबादियों में से एक को नजदीक से देख सकते हैं। वहीं वन्यजीव विशेषज्ञ इस प्रयास को एंडेंजर्ड स्पीशीज की रक्षा के लिए बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।

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