संगीत और शौक केवल मनोरंजन के साधन ही नहीं बल्कि स्वस्थ और खुशहाल जीवन की चाबी हैं। यह कहना है पब्लिक अवेयरनेस फॉर हेल्दी अप्रोच फॉर लिविंग (PAHAL) के मेडिकल डायरेक्टर और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दिवाकर तेजस्वी का।
वे गांधी मैदान के पास कृष्णा साइंस सेंटर में आयोजित संगीतमय कार्यक्रम ‘सफ़र’ में लोगों को संबोधित कर रहे थे।
शौक बनाए रखें जिंदा
डॉ. तेजस्वी ने कहा, “गाना, बजाना, नृत्य, बागवानी, पेंटिंग, पढ़ना, लिखना या खाना बनाना – ये सभी गतिविधियां शरीर और मन दोनों को तरोताज़ा करती हैं। ये न सिर्फ तनाव को कम करती हैं बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी मजबूत करती हैं।”
वैज्ञानिक अध्ययन भी देते हैं सबूत
उन्होंने बताया कि संगीत सुनना या गुनगुनाना ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को नियंत्रित करता है। रिसर्च में यह भी साबित हुआ है कि संगीत सुनने से डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे ‘हैप्पी हार्मोन्स’ रिलीज होते हैं, जो अवसाद और चिंता को कम करने में मददगार हैं।
साथ ही गाना और नृत्य करने जैसी गतिविधियां याददाश्त को तेज़ करती हैं, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाती हैं और नींद की गुणवत्ता में सुधार लाती हैं।
हंसी और रचनात्मकता से लंबी उम्र
डॉ. तेजस्वी ने अंत में कहा, “अपने किसी भी शौक को ज़िंदा रखें, खुलकर हंसें और जिंदगी का आनंद लें। यही लंबी और स्वस्थ जिंदगी का सबसे आसान राज़ है।”


