खान सर-रौशन आनंद विवाद में नया मोड़, वायरल वीडियो ने बढ़ाए सवाल

Khan Sir Roshan Anand Coaching Dispute New Cctv Video
Khan Sir Roshan Anand Coaching Dispute New Cctv Video (PC: BBN24/Social Media)

पटना में खान सर और रौशन आनंद की कोचिंग के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पुलिस जांच के बीच अब एक नया सीसीटीवी वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। वायरल वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत ज्ञान बिंदु कोचिंग के सम्मान समारोह के पोस्टर को फाड़ने से हुई थी।

जानकारी के अनुसार, सामने आया वीडियो 31 मई की रात करीब 11:30 बजे का बताया जा रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति को ज्ञान बिंदु कोचिंग का पोस्टर फाड़ते हुए देखा जा सकता है। यह पोस्टर उसी परिसर में लगा था, जहां खान सर की कोचिंग और ज्ञान बिंदु कोचिंग संचालित होती हैं।

स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि पोस्टर फाड़ने वाला व्यक्ति खान सर के स्टाफ से जुड़ा हो सकता है। हालांकि इस दावे की अभी तक पुलिस या किसी आधिकारिक एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। बताया जा रहा है कि पोस्टर हटाने के बाद दोनों संस्थानों के कर्मचारियों के बीच कहासुनी भी हुई थी।

मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि इसके बाद विवाद और बढ़ गया। आरोप है कि बाद में ज्ञान बिंदु कोचिंग के बोर्ड पर दूसरी कोचिंग का पोस्टर लगाया गया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता गया।

इस बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि सभी वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।

इससे पहले फायरिंग और पथराव से जुड़े वीडियो भी सामने आए थे। मामले में पुलिस ने कुछ लोगों से पूछताछ की है और कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए हथियार को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। संबंधित मामला कदमकुआं थाने में दर्ज है।

दूसरी ओर, रौशन आनंद की रिहाई की मांग को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन भी जारी है। मुसल्लहपुर हाट क्षेत्र में बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन कर निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शन के दौरान दोनों पक्षों के समर्थन में नारेबाजी भी हुई।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने तक किसी भी दावे को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।

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