बिहार में मातृ और नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने मंगलवार को महत्वाकांक्षी ‘जीवनदीप कार्यक्रम’ का शुभारंभ किया। यह पहल राज्य के चिन्हित प्रसव केंद्रों के लेबर रूम और विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (SNCU/NBSU) में मेंटरिंग प्रणाली को उन्नत बनाने पर केंद्रित है।
पहले चरण में 35 अस्पतालों में मेंटरिंग सिस्टम
कार्यक्रम के तहत पहले चरण में 35 जिला अस्पतालों और एसडीएच दानापुर (पटना) में मेंटोरिंग फ्रेमवर्क स्थापित किया जाएगा। अगले चरणों में ज्यादा प्रसव भार वाले अन्य स्वास्थ्य केंद्र भी जोड़े जाएंगे।
मातृ और नवजात देखभाल में ऐतिहासिक बदलाव
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में अब तक राज्य में 45 एसएनसीयू स्थापित हो चुके हैं। 6 अगस्त को 17.40 करोड़ रुपये की लागत से 15 जिलों में मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट (MNCU) का उद्घाटन किया गया, जो मातृ और नवजात देखभाल के मानकों में ऐतिहासिक बदलाव है।
140 मेंटर्स होंगे प्रशिक्षित
कार्यक्रम के तहत प्रत्येक जिला अस्पताल से एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक शिशु रोग विशेषज्ञ, एसएनसीयू और लेबर रूम की एक-एक स्टाफ नर्स सहित कुल 140 मेंटर्स का चयन किया गया है। इन्हें आधुनिक तकनीकी और व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो आगे अन्य अस्पतालों में प्रशिक्षण देंगे।
मातृ मृत्यु दर में कमी
मंगल पांडेय ने बताया कि 2017 में शुरू हुए अमानत कार्यक्रम से नर्सों की क्लिनिकल प्रैक्टिस में सुधार हुआ है। इसका असर 2022 के एसआरएस आंकड़ों में दिखा, जहां बिहार की मातृ मृत्यु दर (MMR) 91 और नवजात मृत्यु दर (NMR) 26 हो गई।
गुणवत्तापूर्ण इलाज का संकल्प
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हर मरीज को गुणवत्तापूर्ण इलाज, हर गर्भवती महिला को सुरक्षित प्रसव और हर शिशु को स्वस्थ जीवन देना सरकार का संकल्प है। उन्होंने निर्देश दिया कि जीवनदीप को एक सस्टेनेबल मॉडल बनाया जाए, ताकि प्रशिक्षण ब्लॉक स्तर पर स्थायी और संस्थागत रूप से जारी रहे।


