पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के नाम पर लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि योजना के लाभार्थी मरीजों से कैश लेकर सरकारी राशि का गबन किया गया। मामले के सामने आने के बाद चार आउटसोर्सिंग कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
IGIMS के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ने शास्त्रीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर अमरजीत राज, चंदन कुमार, साकेत कुमार और अभिषेक कुमार नामक चार आउटसोर्सिंग कर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार, पूरे मामले का खुलासा एक मरीज की शिकायत के बाद हुआ। मरीज ने आरोप लगाया कि वह आयुष्मान भारत योजना का पात्र था, लेकिन उससे इलाज के लिए नकद राशि ली गई। शिकायत मिलने के बाद संस्थान ने जांच समिति का गठन किया।
जांच की अंतरिम रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार मरीजों के दावों को फर्जी तरीके से तैयार किया गया, मेडिकल बिल बढ़ाकर दिखाए गए, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और आयुष्मान योजना के बजाय नकद भुगतान लेकर राशि का दुरुपयोग किया गया। इसके अलावा रिकॉर्ड में हेराफेरी और सार्वजनिक धन की अनधिकृत निकासी के भी आरोप लगे हैं।
मामले के सामने आने के बाद IGIMS प्रशासन ने चारों आरोपित कर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। बताया जा रहा है कि संबंधित आउटसोर्सिंग कंपनी ने कथित रूप से वसूली गई राशि संस्थान को वापस कर दी है।
फिलहाल शास्त्रीनगर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग भी पूरे प्रकरण की अलग से जांच करेगा। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

