बिहार अब सिर्फ राजनीति और इतिहास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेजी से फिल्म शूटिंग का नया हब बनता जा रहा है। राज्य सरकार की नई फिल्म प्रोत्साहन नीति के लागू होने के बाद अब तक 45 फिल्मों और प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है।
यह बदलाव न केवल सिनेमा को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे भी खोल रहा है।
कई भाषाओं में बन रही फिल्में
इस फिल्मी उछाल में विविधता भी देखने को मिल रही है:
- 22 हिंदी फिल्में
- 19 भोजपुरी प्रोजेक्ट्स
- मगही, मैथिली और अंग्रेजी कंटेंट भी शामिल
👉 कुल प्रोजेक्ट्स में:
- 38 फीचर फिल्में
- 6 डॉक्यूमेंट्री
- 1 वेब सीरीज
“बिहार की कहानियां अब सिर्फ किताबों तक नहीं, बड़े पर्दे तक पहुंच रही हैं।”
तेजी से पूरी हो रही शूटिंग
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- जुलाई 2024 से अब तक 39 प्रोजेक्ट्स की शूटिंग पूरी
- बाकी प्रोजेक्ट्स पर काम जारी
👉 सरकार दे रही है:
- सिंगल विंडो क्लीयरेंस
- सब्सिडी
- प्रशासनिक सहयोग
इन जगहों पर बढ़ा शूटिंग क्रेज
फिल्ममेकर्स खास तौर पर इन लोकेशन्स को चुन रहे हैं:
- राजगीर
- बोधगया
- पटना
- मुंगेर
- चंपारण
👉 इन स्थानों के जरिए बिहार की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को वैश्विक मंच मिल रहा है।
ये फिल्में हैं चर्चा में
कुछ प्रमुख प्रोजेक्ट्स:
- बिहार का जलवा
- चंपारण सत्याग्रह
- ओह माय डॉग
- बोध गया का महाबोधि मंदिर
- आदि शक्ति मुंडेश्वरी
👉 ये फिल्में बिहार की संस्कृति, इतिहास और समाज को बड़े पर्दे पर दिखा रही हैं।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को फायदा
फिल्म शूटिंग से:
- पर्यटन को मिलेगा बड़ा बूस्ट
- होटल, ट्रांसपोर्ट, लोकल बिजनेस को फायदा
- युवाओं को नए रोजगार के अवसर
👉 यह पहल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
निष्कर्ष
बिहार अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां सिनेमा, संस्कृति और रोजगार का संगम दिखाई दे रहा है।
👉 अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले समय में बिहार देश का बड़ा फिल्म डेस्टिनेशन बन सकता है।


