Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच जारी है। अब पुलिस इस मामले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए मोबाइल फोन के डेटा और फॉरेंसिक जांच का सहारा ले रही है। जांच एजेंसियां भरत तिवारी के जब्त किए गए मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कर रही हैं, जबकि घटना से जुड़े वीडियो भी जुटाए जा रहे हैं।
मोबाइल फोन की हो रही फॉरेंसिक जांच
जानकारी के अनुसार, एनकाउंटर के बाद पुलिस ने भरत तिवारी का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया था। फिलहाल फोन की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है और उसके डेटा का परीक्षण किया जा रहा है। जांच से संबंधित सामग्री को अदालत के समक्ष भी प्रस्तुत किया जा रहा है।
वहीं, परिजनों का दावा है कि मोबाइल फोन में घटना और पुलिस कार्रवाई से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं। इसी कारण परिवार लगातार फोन वापस करने की मांग कर रहा है।
लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स से मांगे गए वीडियो
जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने आम लोगों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि यदि उनके पास घटना से संबंधित कोई वीडियो या रिकॉर्डिंग है तो उसे जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराएं। पुलिस का मानना है कि ऐसे वीडियो जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं।
हथियारों की भी हो रही जांच
मामले में इस्तेमाल किए गए तीन पिस्टलों की भी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। जानकारी के अनुसार, इनमें निलंबित थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, एसटीएफ जवान अक्षय कुमार और भरत तिवारी से बरामद पिस्टल शामिल हैं।
इसके अलावा घटनास्थल से मिले जिंदा कारतूस और खाली खोखों को भी बैलिस्टिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि गोली किस हथियार से चलाई गई थी।
परिजनों की क्या है मांग?
परिजन लगातार आरोप लगा रहे हैं कि यह फर्जी एनकाउंटर था। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और भरत तिवारी का मोबाइल फोन परिवार को सौंपने की मांग की है।
जांच जारी
फिलहाल पुलिस और फॉरेंसिक टीम सभी तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल डेटा और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

