NEET UG 2026: बुरका पहनकर पहुंची छात्रा को नहीं मिली एंट्री, परीक्षा केंद्र पर हुआ विवाद

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Neet Ug 2026 Burqa Controversy Kulsum Bano Ajmer Exam Centre
Neet Ug 2026 Burqa Controversy Kulsum Bano Ajmer Exam Centre (PC: BBN24/Social Media)

NEET UG 2026 Burqa Controversy: राजस्थान के अजमेर में NEET UG 2026 परीक्षा के दौरान एक छात्रा को लेकर विवाद सामने आया है। परीक्षा देने पहुंची 18 वर्षीय कुलसुम बानो ने आरोप लगाया कि बुरका पहनकर परीक्षा केंद्र पहुंचने पर उन्हें शुरुआत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

रविवार को आयोजित NEET UG 2026 री-एग्जाम में शामिल होने के लिए कुलसुम बानो परीक्षा केंद्र पहुंचीं। छात्रा का आरोप है कि केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों ने उनसे दुपट्टा और बुरका हटाने के लिए कहा। इस पर उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि यदि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) धार्मिक पोशाक की अनुमति देती है, तो परीक्षा केंद्र उन्हें रोक नहीं सकता।

कुलसुम बानो ने कहा कि परीक्षा से ज्यादा उनकी पहचान और धार्मिक आस्था महत्वपूर्ण है। उनका बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

“बुरका मेरी पहचान है”

छात्रा ने कहा, “अगर मुझे इसी पोशाक में परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिलेगी, तो मैं परीक्षा नहीं दूंगी। परीक्षा मेरे लिए उतनी महत्वपूर्ण नहीं है, जितनी मेरी पहचान और मेरा बुरका।”

उन्होंने यह भी कहा कि 18 वर्ष के छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। उनके बयान के बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर समर्थन जताया, जबकि कुछ लोगों ने परीक्षा नियमों और सुरक्षा जांच को प्राथमिकता देने की बात कही।

NEET परीक्षा में क्या हैं ड्रेस कोड के नियम?

राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सुरक्षा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए NTA की ओर से ड्रेस कोड लागू किया जाता है। धार्मिक पोशाक पहनने वाले उम्मीदवारों को आमतौर पर अतिरिक्त जांच प्रक्रिया के लिए निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी जाती है।

सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद उम्मीदवारों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाती है। परीक्षा केंद्रों पर यह प्रक्रिया स्थानीय प्रशासन और परीक्षा अधिकारियों की निगरानी में होती है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक पक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पहचान से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष परीक्षा की सुरक्षा और समान नियमों के पालन की आवश्यकता पर जोर दे रहा है।

फिलहाल परीक्षा केंद्र प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। मामले को लेकर चर्चा जारी है और लोग NTA के दिशा-निर्देशों की ओर भी ध्यान दिला रहे हैं।

नोट: इस मामले में सामने आए आरोप छात्रा के बयान पर आधारित हैं। परीक्षा केंद्र प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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